मंडी। जिले के प्रधान देवता बड़ादेव कमरूनाग रविवार को शिवरात्रि महोत्सव के लिए मंडी पहुंच गए। जिला प्रशासन और देवता कमेटी ने पुलघराट के पास देव माधव राय की छड़ी के साथ देव कमरूनाग का भव्य स्वागत किया। इसके साथ ही छह अन्य देवी-देवता भी मंडी पहुंच गए हैं। उनका भी जोरदार स्वागत किया गया। देव कमरूनाग के मंडी पहुंचते ही अब शिवरात्रि के देव कारज शुरू हो जाएंगे। देव कमरूनाग पुलघराट के पास करीब 2:30 बजे पहुंचे। जैसे ही देव कमरूनाग ने मंडी शहर में प्रस्थान किया तो लोगों की भीड़ इस कद्र उमड़ी कि सड़क पर तिल धरने की जगह भी नहीं बची। अपने बड़ादेव के दीदार के लिए लोग आतुर दिखे। छोटी काशी ढोल नगाड़ों और अन्य वाद्य यंत्रों की ध्वनि से गूंजी उठी। भव्य स्वागत के बाद राज देवता माधोराय से भव्य मिलन हुआ। बड़ा देव कमरूनाग माधव राय मंदिर में मिलन के पश्चात टारना माता मंदिर में विराजमान हो गए हैं। उधर, देवता के साथ ही छह अन्य देवी-देवता भी यहां पर पहुंच गए हैं। उनका भी जिला प्रशासन और सर्वदेवता कमेटी द्वारा विभिन्न स्थानों पर स्वागत किया गया। इन देवी देवताओं का स्वागत भी राज देवता की छड़ी के साथ गुरुद्वारा और पुरानी मंडी में किया गया। सर्वदेवता समिति के प्रधान शिवपाल शर्मा ने बताया कि रविवार को मंडी शिवरात्रि महोत्सव के लिए बड़ा देव कमरूनाग के साथ अन्य छह देवी-देवता पहुंच गए।
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बड़ादेव के साथ इन देवी-देवताओं का भी हुआ मिलन
अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के लिए मंडी में बड़ा देव कमरूनाग के साथ-साथ अन्य छह देवता भी मंडी पहुंच गए हैं। इनमें देव बूढ़ा बिंगल रूहंज और झाथी वीर का स्वागत पुरानी मंडी में माधव राय की छड़ी के साथ किया गया। सुखदेव ऋषि थट्टा, ढगाड़ू देव और नरोल देवियों बगुलामुखी बाखली और बूढ़ी भैरवा पंडोह का पड्डल में देवता कमेटी ने स्वागत किया। इन देवताओं का भी बड़ादेव कमरूनाग के साथ भव्य मिलन हुआ।
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अब टारना से शिवरात्रि का नजारा देखेंगे बड़ा देव
माधोराय और अन्य देवी देवताओं से मिलन के बाद बड़ा देव एक सप्ताह तक टारना माता मंदिर में ही विराजमान हो गए। इस दौरान देवता के भक्त उनसे मिलने टारना मंदिर में पहुंचते हैं। देवता शिवरात्रि महोत्सव की जलेब में शामिल न होकर टारना मंदिर से ही पूरा नजारा देखते हैं। इस दौरान टारना मंदिर में देव दर्शन की एक सप्ताह तक लोगों की भीड़ उमड़ी रहती है। देव कमरूनाग शिवरात्रि महोत्सव के समापन पर टारना से नीचे आते हैं और शहर में अपने श्रद्धालुओं के घर विराजमान होकर अपने मूल स्थान के लिए रवाना होते हैं।
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