चैलचौक (मंडी)। मंडी जिले का सेब सर्व प्रथम राजधानी दिल्ली की मंडी में दस्तक देगा। टाइड मैन, समर क्वीन और रेड जून वैरायटी का सेब जल्द मंडियों में पहुंचेगा। मंडी जिले में सेब बगीचों की बोली का दौर चरम पर है। व्यापारी और सेब बागवान सेब बगीचों में जाकर फलों की खरीद करने में जुट गए हैं। कमरूघाटी, एप्पल वैली करसोग और जंजैहली घाटी में सेब के बगीचों में सौदेबाजी शुरू हो गई है। इस बार सेब पर ओलों की मार पड़ी है। इससे व्यापारी सोच-समझकर बगीचों की बोली लगा रहे हैं। ओलों से चालीस से साठ फीसदी पैदावार प्रभावित बताई जा रही है। मगर अब तक मंडी जिला में करीब 1 करोड़ के सेब बगीचों की बोली हो चुकी है। इस बार पैदावार कम होने से सेब की अच्छी कीमतें मिलने की उम्मीद है।
अंतरराष्ट्रीय आजादपुर सब्जी मंडी दिल्ली के आढ़तियों ने क्षेत्र के सेब बागवानों और व्यापारियों से संपर्क तेज कर दिया है। जिन बगीचों की बोली हो चुकी है वहां बागवानों और व्यापारियों ने तुड़ान शुरू कर दिया है ताकि, समय पर बागवान अपने उत्पाद मंडियों तक पहुंचा सके। मंडी जिले में इस बार करीब 20 से 25 लाख सेब पेटियों के उत्पादन का अनुमान है। मंडी जिले का सेब सर्व प्रथम राजधानी दिल्ली मंडी में दस्तक देता है। जिसके बाद शिमला, कुल्लू, किन्नौर और अन्य जिलों समेत पड़ोसी राज्यों का सेब चलना शुरू हो जाता है। नाचन फ्रूट वेजिटेबल ग्रोवर एसोसिएशन के प्रधान बिंदर ठाकुर और उप प्रधान प्रेम सिंह ठाकुर ने बताया कि क्षेत्र में सेब बगीचों की बोलियां शुरू हो गई हैं। टाइड मैन, समर क्वीन और रेड जून जल्द अंतरराष्ट्रीय मंडियों में दस्तक दे सकता है। ठाकुर ने बताया कि मंडी जिले में सेब की अरली वैरायटी राजधानी दिल्ली में जल्द धूम मचा सकती है। बागवानों में चंद्रमणी ठाकुर, दीवान चंद, ठाकर दास, तवारू राम, संजय ठाकुर, भीम सिंह, दीनानाथ, हंसराज ठाकुर, चंद और देवीराम ठाकुर ने बताया कि कमरूघाटी में सेब बगीचों की बोलियों का दौर शुरू हो गया है। बागवानी विशेषज्ञ डा. एसपी भारद्वाज ने बताया कि हिमाचल में इस बार सेब की कम पैदावार है। जिसका कारण मौसम परिवर्तन रहा है।