बालीचौकी (मंडी)। बालीचौकी के दुर्गम क्षेत्र गाड़ागुशैणी में खोले गए राजकीय महाविद्यालय की कक्षाएं राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के तीन कमरों में चल रही हैं। 2013 में खोले गए कॉलेज के लिए भवन की व्यवस्था न होने के कारण प्रवक्ताओं व छात्र-छात्राओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं अब क्षेत्र के छात्र-छात्राएं यहां पर दाखिला लेने से कतरा रहे हैं।
हालांकि कॉलेज भवन पांच करोड़ रुपये की लागत से बनेगा, लेकिन चार वर्ष बीत जाने के बाद भी अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया है। छात्र-छात्राओं को यहां पर उचित सुविधा न मिलने के कारण 30 किलोमीटर दूर बंजार कॉलेज जाना पड़ता है। इसके चलते उन्हें लंबा सफर तय करना पड़ रहा है। वर्तमान में चल रहे इस कॉलेज में 127 छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
कॉलेज का अपना भवन न होने के कारण 127 छात्र-छात्राओं को सरकारी स्कूल के भवन में ही पढ़ना पड़ रहा है। हालांकि यह कॉलेज जिला कुल्लू में बन रहा है और छात्र-छात्राओं की कक्षाएं जिला मंडी की राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के भवन में लगती हैं। क्षेत्र के रोशन चौहान, डिंकू ठाकुर, भवानी, बिट्टू डोगरा, युद्धवीर चौहान, मनमोहन, चिंतु चंदेल, सोनू आदि का कहना है कि चार साल बीत जाने के बाद अभी तक विभाग ने कॉलेज को बनाने की जगह ही चिह्नित की है। वर्तमान कॉलेज भवन में मात्र 3 कमरे हैं, जिसमें एक हाल है और एक स्टाफ रूम और एक प्रधानाचार्य आफिस है। प्रधानाचार्य के कक्ष को पर्दे लगाकर आधा किया गया है और पर्दे के दूसरी तरफ कक्षाएं लगाई जाती हैं। हैरानी की बात तो यह है कि 127 छात्र-छात्राएं 3 कमरों में ही शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। कॉलेज में कला, वाणिज्य संकाय की पढ़ाई करवाई जाती है। इस बारे में जब महाविद्यालय बंजार के प्रधानाचार्य मनदीप शर्मा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि पूरी फाइल तैयार कर ली है और इसे फोरेस्ट सर्कल को सौंप दिया गया है।
लोक निर्माण विभाग बंजार के सहायक अभियंता आरएल ठाकुर ने बताया कि कॉलेज भवन के लिए जगह चिह्नित की गई है। यह लैंड फोरेस्ट सर्कल और तहसील की है। जब तक इस लैंड को हायर एजूकेशन को नहीं सौंपा जाता तब तक निर्माणकार्य शुरू नहीं किया जा सकता है।