मंडी। स्काटलैंड, दुबई और यूएस पुलिस की तर्ज पर हिमाचल पुलिस भी स्मार्ट बनेगी। चोरी, रेप, डकैती और अन्य आपराधिक मामलों में संलिप्त शातिरों के फेस स्कैन कर डाटा बैंक बनेगा। सिटी में इर्द गिर्द, संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में फेस डिटेक्शन कैमरे से इन शातिरों पर नजर रखी जाएगी। कोई भी क्राइम होने पर इन कैमरों के माध्यम से हिस्ट्रीशीटर एवं अन्य अपराधियों की लोकेशन अगर आबादी के आसपास है, तो आसानी से ट्रेस होगी। यहीं नहीं सुरक्षा व्यवस्था में जीपीएस और ड्रोन जैसे उपकरणों का भी इस्तेमाल होगा। बड़ी रैलियों और समागम में ड्रोन के माध्यम से सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को कंट्रोल किया जाएगा। सूबे में क्राइम का ग्राफ बढ़ने का अहम कारक प्रवासियों के नाम दर्ज होने के साथ-साथ फिंगर प्रिंट भी लिए जाएंगे ताकि अपराध के दौरान पाए जाने वाले साक्ष्यों से मिलान किया जा सके। यह संभव होगा सेफ सिटी योजना से, जिसे मंडी पुलिस ने तैयार किया है। इसे लेकर अधोसंरचना का खाका तैयार हो चुका है। शुक्रवार से इस कवायद पर मंडी पुलिस काम करने के लिए लोगों से राय लेगी और डीपीआर बनाकर एसपी के माध्यम से प्रदेश सरकार को भेजी जाएगी। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री निजी तौर पर भी इस प्लान में रुचि दिखा रहे हैं। यदि यह कवायद रंग लाई तो प्रत्येक जिला मुख्यालय में सेफ सिटी योजना लागू होगी। उधर वीरवार को डीएसपी हितेश लखनपाल ने इस योजना की ब्रिफिंग की। डीएसपी हेडक्वार्टर हितेश लखनपाल ने बताया कि मंडी पुलिस ने सेफ सिटी प्लान तैयार किया है। इस प्लान पर करीब 4 करोड़ तक का खर्च आएगा।
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2013 में सूरत में लागू हुई थी सुरक्षा सेतू योजना
2013 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात के सूरत में भी इस तरह की योजना लागू हुई थी। हालांकि इसमें हिमाचल पुलिस की सेफ सिटी की तरह आधुनिकता और एडवांस तकनीक नहीं थी। यह कवायद सफल नहीं हो सकी। जबकि हिमाचल पुलिस का दावा है कि यह कवायद सफल रहेगी।
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शहर में लगेंगे 150 से 200 आधुनिक कैमरे
प्लान के अनुसार पूरे शहर में 150 से 200 आधुनिक कैमरे लगाने का प्लान है। कैमरों में कैद गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक कंट्रोल रूप स्थापित होगा, जिसे हॉक नाम दिया गया है। हॉक में बैठे पुलिस अधिकारी पूरे शहर के हर हालात पर नजर रखेंगे। ट्रायल पर यह कैमरे पुलघराट, सौली खड्ड, भ्यूली, खलियार और तल्याहड़ तक स्थापित किए जाएंगे।
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सुरक्षा दूत एप्प देगा आपको सुरक्षा
पुलिस शहर की जनता के साथ ही व्यापार मंडल, सामाजिक संस्थाओं, युवक मंडलों, स्कूल, कॉलेज, विभिन्न यूनियनों को पार्टनर बनाएगी। सुरक्षा दूत नाम से ऐप भी शुरू करेगा। इसमें यदि आप रात को घर से बाहर बस पकड़ने या किसी काम से जा रहे हैं तो आपको ऐप में सूचना देनी होगी। बाकी काम जीपीएस करेगा। आपकी लोकेशन ट्रेस होगी और गंतव्य तक पहुंचने की सारी गतिविधियों पर नजर रहेगी।
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सालाना बचेंगे ढाई करोड़ : गुरदेव चंद
एसपी मंडी गुरदेव चंद ने बताया कि सीएम के जिले में कानून व्यवस्था में मॉडल पेश करने की कोशिश की जा रही है। शुक्रवार से लोगों से इस योजना की राय ली जाएगी। डीपीआर बनाकर प्रदेश सरकार को भेजी जाएगी। प्लान सफल रहा तो हर साल पुलिस के ढाई करोड़ रुपये बचेंगे।
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ये होंगे फायदे
योजना से महिलाओं की सुरक्षा पुख्ता होगी, क्योंकि कैमरे हर वाहन पर पूरी नजर रखेंगे। फेस डिटेक्शन कैमरे लगने से यह कैमरे शहर में आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के चेहरों को स्कैन करेंगे, जिससे उनकी हर गतिविधि पर नजर रहेगी। वहीं, बाहरी लोग भी यहां आकर क्राइम करने से डरेंगे और शहर में एक बेहतरीन कानून व्यवस्था लागू होगी।