बालीचौकी (मंडी)। क्षेत्र की ग्राम पंचायत सोमगाड़ के पलाईधार में अंबिका माता के ऐतिहासिक होम में दहकती मशालों पर श्रद्धालुओं ने खूब लड़ाई कर बुराई पर खूब चोट की। यह अनूठी परंपरा सदियों से क्षेत्र में चली आ रही है। हर वर्ष बैसाखी संक्रांति पर्व से एक दिन पहले माता का होम धूमधाम से मनाया जाता है। जिसमें सराज के बड़ोदव विष्णु मतलोड़ा भी भाग लेते हैं। बुधवार देर रात पलाईधार में आयोजित इस होम में हजारों लोगों ने शिरकत की। इस धार्मिक कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए सराज के दुर्गम पंचायतों से लोग पहुंचे। मान्यता है कि इस होम में शिरकत करने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है। देवता के गूर मीने राम का कहना है कि यह होम हर वर्ष मनाया जाता है। देवता के कारदार नानक चंद ने कहा कि ये होम माता का एक जगराता है। जिसमें स्थानीय लोग लकड़ी के बड़े-बड़े मशाल बनाकर उसमें आग जलाकर आपस में लड़ते हैं। आग की लपटों पर होने वाले इस खतरनाक खेल में किसी को आंच तक नहीं आती है। पुजारी नोक सिंह का कहना है कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और हर साल इस होम को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
गालियां देकर भगाई जाती हैं बुरी शक्तियां
माता के भंडारी भूपेंद्र, केशव राम, चतर ठाकुर, खेम सिंह, गुर धर्म दास, राम सिंह, नोक सिंह, रोशन लाल ने कहा कि होम के दौरान अश्लील गालियां भी दी जाती हैं। माना जाता है कि गालियों से बुरी शक्तियों को भगाया जाता है। सदियों से यह परंपरा यहां पर चली आ रही है। बुधवार रात को आयोजित होम में इस परंपरा का आयोजन भी बखूबी किया गया।
पेड़ के ऊपर चढ़ कर विभूति बांटते हैं गूर
होम के दौरान क्षेत्र के डमसेहड़ गांव में गूर खेलते हैं। पेड़ पर चढ़ कर गुर माता का शेष (विभूति) देते हैं। पेड़ के ऊपर से गिरने वाली यह शेष जिस व्यक्ति को मिलती है, उसका आने वाला समय अच्छा रहता है। इस शेष को पाने के लिए श्रद्धालुओं में खासी भीड़ रहती है।