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कागज के लिफाफे में खाद्य पदार्थ परोसने पर तत्काल पाबंदी लगाने की उठी मांग

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मंडी बचाओ संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष ने उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन - फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला ब्यूरो

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मंडी।
शहर में व्यापारियों द्वारा धड़ल्ले से कागज के प्रिंटेड लिफाफों में खाद्य पदार्थों को परोसा जा रहा है। जो कभी जानलेवा हो सकते हैं। इन कागजों पर लगी स्याही में कई प्रकार के कैमिकल होते हैं जो उन खाद्य पदार्थों में घुल-मिल जाते हैं और भोजन से शरीर में चले जाते हैं।

इससे गले और आंत का कैंसर जैसे घातक रोग हो सकते हैं। इसी दावे के साथ मंडी बचाओ मोर्चा ने उपायुक्त मंडी को ज्ञापन सौंपा। इसमें मांग की गई कि ऐसे लिफाफों पर खाद्य पदार्थ देने पर प्रतिबंध लगाया जाए। ज्ञापन के माध्यम से बताया कि शहर में शहर में खाद्य पदार्थ विक्रेताओं द्वारा जानलेवा रसायन युक्त गंदे कागज के लिफाफे में खाद्य पदार्थ परोसने वाले दुकानदारों पर तुरंत कानूनी कार्यवाही करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए जाएं। उपायुक्त मंडी ऋग्वेद मिलिंद ठाकुर ने कहा कि इस संदर्भ में पूरी जानकारी ली जाएगी। आवश्यकता अनुसार कवायद शुरू होगी।
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क्यों घातक है प्रिंटेड कागज
प्रिंटेड कागज में घातक रसायन जैसे बैजिंम, नाइट्रो, पोमाईल, फासफोरस, रेडिमेड पेंट, मिट्टी तेल व अन्य घातक रसायन इस्तेमाल होते हैं। लोग कई महीनों तक इन कागजों को रखते हैं। बाद में कबाड़ में बेच देते हैं। जिसके चलते दुकानदार व अन्य विक्रेता इन कागज के लिफाफों को खरीदते हैं और ग्राहकों को उन लिफाफों में सामान बेच देते है। कागजों पर लगी स्याही में कई प्रकार के कैमिकल होते हैं। जो उन खाद्य पदार्थों में चिपक जाते हैं और उसी पदार्थ को हम खा लेते हैं। इससे कैंसर तक हो सकता है। खाद्य पदार्थ डालने से घातक रसायन उन खाद्य पदार्थों में घुल-मिल जाता है जिससे आज कल गले का कैंसर व आंत का कैंसर जैसे घातक रोग तक पनप रहे हैं।

यह रखी समिति ने मांग
मंडी बचाओ संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष ने लक्ष्मेंद्र सिंह ने कहा कि इस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए जिले के सभी खाद्य विभागीय अधिकारियों को शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से घातक रसायन युक्त छपाई वाले छोटे-बड़े कागज के लिफाफों में खाद्य पदार्थ परोसने पर पूर्ण रूप से पाबंदी लगाने के निर्देश जारी किए जाएं।
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स्याही युक्त कागज घातक : सीएमओ
सीएमओ डॉ. देस राज शर्मा ने कहा कि स्याही युक्त कागज के प्रभाव घातक हो सकते हैं। इससे कई बीमारियां पनप सकती हैं। स्वास्थ्य विभाग इस मामले पर गौर करेगा। प्रशासन के निर्देशानुसार इस संबंध में दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे ताकि लोगों के स्वास्थ्य पर विपरित असर ना पड़े।

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