बरोट (मंडी)। 110 मेगावाट परियोजना के बरोट रेजर बायर से ऊहल नदी में सिल्ट छोड़ने से बरोट से ऊहल नदी के 10 किलोमीटर क्षेत्र तक सैकड़ों छोटी और बड़ी ट्राउट मछलियां और इनके अंडे बर्बाद हो गए हैं। जिससे स्थानीय लोगों में प्रोजेक्ट प्रबंधन के खिलाफ रोष बढ़ने लगा है। उपायुक्त मंडी को भी स्थानीय लोगों ने इस सिलसिले में ज्ञापन सौंप कर प्रोजेक्ट प्रबंधन के खिलाफ शिकायत की थी। लोगों ने सिल्ट को ऊहल नदी में डंप करने के बजाए किसी अन्य स्थान पर डंप करने की मांग उठाई थी। उपायुक्त के निर्देशों पर शनिवार को एसडीएम पधर मौके पर पहुंचे। एसडीएम पधर आशीष शर्मा ने एसई शानन परियोजना गुरमीत सिंह के साथ रेजर वायर का मुआयना किया।
ऊहल की बजाए कहीं और डंप की जाए सिल्ट
जिला भाजपा के सचिव काहन सिंह, बरोट पंचायत प्रधान रंजना देवी, बरधान पंचायत प्रधान गंगी देवी, राम सिंह, रामदास, श्याम चंद उपप्रधान बरोट ने कहा कि शानन परियोजना के अधिकारी रेजर वायर से सिल्ट चैनल से ऊहल नदी में डाल रहे हैं। जिससे सारी ट्राउट मछलियां मर गई हैं। जबकि आजकल ट्राउट मछलियां अंडे देती हैं। उन्होंने कहा कि उपायुक्त को इस बारे में शिकायत सौंपी गई है। लिखित प्रस्ताव में लोगों ने रेजर वायर से सिल्ट उठा कर ऊहल नदी के बजाए किसी दूसरी जगह बाहर डंप करने की मांग उठाई है। जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के साथ ऊहल नदी की ट्राउट भी बच जाएगी।
उपायुक्त को सौंपेंगे रिपोर्ट : एसडीएम
एसडीएम पधर आशीष शर्मा ने कहा कि रिपोर्ट जिलाधीश मंडी को भेजी जाएगी। मौके का जायजा लिया गया है। प्रोजेक्ट अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए गए हैं। परियोजना के एसई गुरमीत सिंह ने पुष्टि करते कहा इस रेजर वायर का सिल्ट निकालने का कार्य 2005 में शुरू हुआ था। जिस तरह 2005 से पहले सिल्ट निकालने का कार्य होता था उसी प्रकार किया जाएगा।