इलाका उत्तरशाल के पराशर की पहाड़ियों पर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ने से इसके धंसने का खतरा बढ़ गया है। इससे दर्जनों गांवों के लिए खतरा हो गया है। बीते दिनों हुई भारी बारिश के कारण इन पहाड़ियों की मिट्टी भी खिसकने लगी है। इस कारण पहाड़ी पर गहरी व लंबी दरारें पड़ गई हैं। इसी बीच शनिवार को मलबे के साथ बागी नाले में आई बाढ़ ने रौद्र रूप दिखाया है। इससे ग्रामीण खौफजदा हैं। हालांकि इस बाढ़ से कोई जानी नुकसान नहीं हुआ हैं।
इलाका उत्तरशाल का पराशर क्षेत्र चारों तरफ से पहाड़ियों से घिरा हुआ है। यहां ओरोग्राफिक प्रभाव के चलते अकसर बादल फटते हैं। कई सालों से बादल फटने की घटनाओं से पराशर की पहाड़ी में लगातार भूस्खलन हो रहा है। यह कभी भी तबाही मचा सकता है। यहां का मलबा बादल फटने के बाद बागी गांव तक पहुंचता है और तबाही मचाता है। यहां कोटरोपी जैसे हालात बन सकते हैं। फिलहाल आसपास रहने वालों को अलर्ट कर दिया गया है। पराशर में ऋषि पराशर की तपोस्थली और प्राचीन झील है। इसलिए इस धार्मिक स्थान के साथ लाखों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। पिछले कई सालों से बादल फटने के बाद पराशर झील से करीब 500 मीटर दूरी पर एक जगह लगातार बागी की तरफ भूस्खलन हो रहा है।
उधर, पंचायत शेगली के उपप्रधान छपे राम, पंचायत टिहरी की प्रधान भागदासी, उपप्रधान नरोत्तम ठाकुर, कटौला की प्रधान जयंवती ठाकुर, उपप्रधान शिव चंद ठाकुर, पंचायत प्रधान भीमसेन ने कहा कि शासन व प्रशासन इस बारे में उचित कदम समय रहते उठाए। वहीं विधायक पूर्ण चंद ठाकुर का कहना है कि पराशर में लगातार भूस्खलन हो रहा है। यहां की समस्या के बारे में उन्होंने विधानसभा में भी अवगत करवाया था, लेकिन सरकार ने अभी तक कुछ नहीं किया है।