सीईसी ने किया प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण।
- फोटो : संवाद
फोरलेन और अन्य बड़ी अधोसंरचना परियोजनाओं से पहाड़ों की कटिंग, मलबा निस्तारण और पर्यावरण पर पड़ रहे प्रभाव की हकीकत जानने के लिए सुप्रीम कोर्ट की केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने मंगलवार को मंडी जिले का दौरा किया। समिति ने पंडोह से नगवाईं तक विभिन्न परियोजना क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर वन एवं पर्यावरणीय प्रावधानों के अनुपालन की स्थिति परखी। निरीक्षण के दौरान दरकती पहाड़ियों को सुरक्षित करने का मुद्दा प्रमुखता से उठा। समिति ने प्रभावित ढलानों के स्थिरीकरण और सुरक्षा कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
अधिकारियों से सुरंग निर्माण में अपनाई जा रही तकनीक, सुरक्षा उपायों और निर्माण से प्रभावित क्षेत्रों की बहाली की जानकारी भी ली गई। समिति ने पधर से शिल्पा किप्पड़ तक सड़क और सुरंग निर्माण क्षेत्रों का निरीक्षण किया। इसके बाद नेरचौक-कुल्लू सड़क के विभिन्न हिस्सों, पंडोह और लारजी बांध क्षेत्र का जायजा लिया। शालनाल स्थित मलबा डंपिंग साइट पर पहुंचकर मलबे के निस्तारण और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों को देखा। लारजी बांध के समीप बहाली स्थल का भी निरीक्षण किया गया। एनएचएआई, एनएचपीसी, एनटीपीसी और वन विभाग के अधिकारियों ने समिति को परियोजनाओं की प्रगति और पर्यावरणीय प्रावधानों के अनुपालन की जानकारी दी।
सीईसी ने संबंधित विभागों को पर्यावरण संरक्षण नियमों का कड़ाई से पालन करने और विकास कार्यों के साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। समिति ने विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया। बगलामुखी मंदिर रोपवे क्षेत्र का भी निरीक्षण किया गया। समिति मौके से जुटाई जानकारी के आधार पर अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी।