संवाद न्यूज एजेंसी
केलांग (लाहौल-स्पीति) हिमाचल में लोगों को अब आबादी देह में बने मकानों का स्वामित्व (मालिकाना हक) मिलने के साथ भूमि का पर्चा भी मिलेगा। खसरा नंबर के तहत लोगों को मकान के पर्चे उपलब्ध होंगे, जिसे लोग लोन लेने के लिए बैंकों में गिरवी रख सकेंगे। पहले आबादी देह में बने मकानों का लोगों को पर्चा नहीं मिलता था। इस कारण लोग लोन के लिए इन मकानों को बैंकों में गिरवी नहीं रख पाते थे।
केंद्र सरकार के स्वामित्व योजना के तहत हिमाचल के जनजातीय जिलों में आबादी देह क्षेत्र की बाहरी सीमाओं की निशानदेही का कार्य अंतिम चरण में है। राजस्व विभाग इस काम को अंजाम दे रहा है। निशानदेही होने के बाद सर्वे ऑफ इंडिया (भारतीय सर्वेक्षण विभाग) ड्रोन की मदद से आबादी देह गांव की बाहरी सीमाओं की तस्वीर खींच कर इसे कंप्यूटर की मदद से कागजों पर उतरेगा। इसके बाद गांव में लोगों के बने मकानों के साथ उनके आंगन और कब्जा किए गए क्षेत्र की सीमाओं की भी निशानदेही होगी। इससे पता चल पाएगा कि लोगों के पास मकान समेत आंगन के लिए कितने क्षेत्र पर कब्जा है।
सर्वे ऑफ इंडिया पूरे गांव के साथ व्यक्तिगत कब्जों का अलग से क्षेत्र निकाल कर राजस्व विभाग को सौंपेगा। हालांकि आबादी देह क्षेत्र का पूरा रिकॉर्ड पंचायत के पास मौजूद रहेगा। निशानदेही और नक्शा बनाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद हर आबादी देह गांव की भूमि को एक खसरा नंबर मिलेगा। बताया जा रहा है कि सर्वे ऑफ इंडिया करीब 50 लाख रुपये कीमत के अत्याधुनिक ड्रोन कैमरे से आबादी देह गांव की तस्वीर खींचेगा, जिसे चंडीगढ़ में कागजों में उतारा जाएगा।
अंतिम चरण में निशानदेही का काम: नरेंद्र
लाहौल-स्पीति के तहसीलदार नरेंद्र ने बताया कि घाटी में आबादी देह गांवों की निशानदेही अंतिम चरण में है। लाहौल-स्पीति में कुल 217 आबादी देह गांव मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि मकान और कब्जा होने के बावजूद अब तक लोगों का इसका मालिकाना हक नहीं मिला है। निशानदेही के बाद लोगों को जमीन और मकान का स्वामित्व मिल जाएगा। खसरा नंबर मिलने के बाद मकान का पर्चा निकाल कर लोग बैंकों में जमा कर लोन ले सकते हैं।