सैंज क्षेत्र में ग्रामीणों को मिली गुच्छी, जिन्हें सुखाने के लिए धागे से बीनकर रखा गया है। संव
सैंज (कुल्लू)। घाटी के जंगलों में गुच्छी का सीजन शुरू हो गया है। ग्रामीण महिलाएं गुच्छी की तलाश कर इन्हें बेचकर अच्छी कमाई भी कर रही हैं। ग्रामीण महिलाएं सुबह होते ही टोकरियां लेकर घने जंगलों की ओर निकल रही हैं। शाम को कोई 50 ग्राम तो कोई 100 ग्राम से अधिक गुच्छी इकट्ठा कर रही हैं। गुच्छी औषधीय गुणों से भरपूर होती है। तीन से चार महीनों के सीजन में महिलाएं अपना सालभर का खर्च भी गुच्छी के माध्यम से ही निकाल लेती है।
पॉलीहाउस में तैयार कृत्रिम गुच्छी से बाजार पर असर पड़ा है। बाजार में 5500 रुपये प्रतिकिलो तक गुच्छी के दाम बने हुए हैं। सैंज घाटी की महिला उर्मिला धामी ने कहा कि प्राकृतिक गुच्छी का स्वाद बेहतर होता है। महिलाएं दिनभर जंगलों में गुच्छी की तलाश कर रही हैं। संवाद