सैंज मेले के दौरान नाटी डालते देवलू और महिलाएं।-संवाद
सैंज (कुल्लू)। जिलास्तरीय सैंज मेले में देव मिलन और लोक संस्कृति की अनूठी परंपरा देखने को मिली। घाटी के प्रमुख आराध्य देवता लक्ष्मी नारायण, माता आशापुरी, देवता रिंगू नाग, देवता सुनुनारायण और देवता श्रीनाग की उपस्थिति में माहौल भक्तिमय हो गया।
वीरवार को पारंपरिक कुल्लवी नाटी का आगाज हुआ। मेले का मुख्य आकर्षण विभिन्न महिला मंडलों की सामूहिक नाटी रही। इसमें सैकड़ों महिलाएं पारंपरिक पट्टू और धाठू में सजी नजर आईं।
पारंपरिक वेशभूषा में इन महिलाओं ने जब एक-दूसरे का हाथ थामकर घेरा बनाया, तो पूरी घाटी सुरों की लहरियों में डूब गई। ढोल-नगाड़ों और करनाल की गूंज के बीच डाली गई नाटी को देखने के लिए घाटी के कोने-कोने से लोग पहुंचे थे। इस सांस्कृतिक उत्सव में स्थानीय विधायक सुरेंद्र शौरी भी खुद को रोक नहीं पाए। उन्होंने आम जनता और देवलुओं के साथ मिलकर कुल्लवी नाटी में कदम से कदम मिलाए।