कुल्लू। रघुपुर घाटी में महिलाओं ने डेयरी पालन में हाथ आजमा कर अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारा है। घाटी की चार पंचायतों की हजारों महिलाएं दुग्ध क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनकर हर माह हजारों रुपयों की कमाई कर रही हैं। घाटी की महिलाएं पहले अपनी जरूरतों के लिए ही गायों को पालती थीं। अब व्यावसायिक रूप से गायों का पालन किया जा रहा है।
वर्तमान में सरकार की ओर से गाय के दूध के दाम बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर करने पर महिलाओं का रुझान डेयरी पालन की तरफ बढ़ गया। फनौटी, लगौटी, करशैईगाड़ और टकरासी पंचायत से जहां पांच साल पहले 1,000 लीटर दूध मिल्क प्लांट के लिए जाता था। अब यह बढ़कर करीब 4,000 लीटर से अधिक पहुंच गया है। महिलाओं ने अच्छी नस्ल की गाय पालना शुरू किया।
अब परिवार मेें एक महिला 10 से 15 हजार रुपये प्रति महीना की कमाई कर रही हैं। दुग्ध उत्पादक सुभद्रा देवी, सोनू देवी, डूली देवी, पुष्पा ठाकुर, मीरा देवी, कांता देवी ने कहा कि दूध बेचकर वह आत्मनिर्भर बनी हैं। राज्य मिल्कफेड के अध्यक्ष बीएस ठाकुर ने कहा कि सरकार ने गाय के दूध के दाम को अब बढ़ाकर 51 से 61 रुपये किया है। सरकार ने जब से दूध से रेट निर्धारित किए हैं, तब से गाय पालन में बड़ी संख्या में वृद्धि हुई है।
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दूध उत्पादन से रघुपुर घाटी की महिलाएं आत्मनिर्भर हुई हैं। गांव जुहड़ में लगभग हर घर में गाय पालकर महिलाएं दूध के कारोबार से जुड़ी हैं। महिलाएं दूध से अपनी आर्थिकी स्थिति को मजबूत कर रही हैं।
-गीता देवी, गांव जुहड़
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मैं चार-पांच साल से गाय को पाल रही हूं। पहले गाय को पालना छोड़ दिया था, वहीं सरकार की ओर से दूध खरीद के साथ दाम बढ़ाने से महिलाओं का रुझान डेयरी पालन की ओर बढ़ा। महिलाएं गाय पालन से पूरे परिवार का पालन पोषण कर रही हैं।
-मीरा ठाकुर, गांव बनाला
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महिला---गीता देवी।