जनवरी माह का पहला पखवाड़ा बीत चुका है, लेकिन इस साल बर्फबारी पर्याप्त रूप से नहीं हुई है। हालांकि, ऊंचे क्षेत्रों में बर्फबारी तो हुई लेकिन अधिकतर सेब बगीचों वाले इलाकों में पर्याप्त हिमपात नहीं हुआ है। ऐसे में बगीचों में पर्याप्त नमी के अभाव के कारण कई बीमारियों के पनपने की आशंका है। वहीं, खाद भी उचित तरीके से तौलियों में घुल नहीं पा रही है। समय पर बर्फबारी नहीं हुई तो कई कीट पतगों के पनपने की आशंका और बढ़ जाएगी।
गत साल बर्फ बारी दिसंबर माह ही पड़ी थी। जिसके कारण समय पर चिलिंग आवर्स भी समय पर पूरे हुए थे और सेब की फ सल भी चौखी हुई थी। मगर इस साल बर्फबारी तो दूर, बारिश भी वक्त पर नहीं हो रही है। जानकारों की मानें तो बर्फबारी का होना सेब की फसल के लिए अति आवश्यक हैै। बर्फबारी से सेब के पौधों में लगने वाली कई बीमारियां खत्म हो जाती हैं। वहीं, कई कीट भी मर जाते हैं।
घाटी के बागवान अमित, कमल, जोगिंद्र, रोशन, केहर सिंह, जितेंद्र, राज आदि का कहना है कि इस साल का मौसम काफी शुष्क चल रहा है। इसके चलते बगीचों में मनमाफि क नमी नहीं है। ऐसे में खाद और गोबर भी सही तरीके से घुल नहीं रहा है। उद्यान विभाग के विकास अधिकारी उत्तम पराशर का कहना है कि जनवरी और दिसंबर में बर्फबारी का होना सेब फसल के लिए जरूरी है। इस साल का मौसम अभी तक अनुकूल नहीं है, मगर जनवरी और फरवरी में बर्फबारी हो जाती है तो इसकी कमी पूरी हो जाएगी।