आपदा की मार झेल रहे बंजार उपमंडल के लोगों तक हेलिकाप्टर से पहुंचाया राशन
सड़कें टूटीं, एलपीजी खत्म, राशन भी नहीं बचा, बिना बिजली अंधेरे में रहे रहे ग्रामीण
दर्जनों गांवों में 40 से अधिक घर मलबे में बदले, 150 परिवारों ने छोड़ा अपना आशियाना
संवाद न्यूज एजेंसी
बंजार (कुल्लू)। बारिश थम चुकी है लेकिन बंजार की जिंदगी अब भी उथल-पुथल में है। भूस्खलन से घर उजड़ चुके हैं, रास्ते टूट चुके हैं और पेट भरने का इंतजाम भी अब आसमान के भरोसे है।
उपमंडल के थाटीबीड़, बलागाड़, मशियार और दर्जनों गांवों में 40 से अधिक घर मलबे में तब्दील हो गए जबकि 150 परिवार अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए। हेलिकाप्टर से राशन और राहत सामग्री भेजी जा रही है। जब तक सड़कें नहीं खुलतीं, तब तक यह राहत सिर्फ कुछ घड़ियों की राहत बनकर रह जाती है। एलपीजी खत्म है, राशन नहीं बचा, मोबाइल नेटवर्क भी ठप है। ऐसे में गांव अब भूख और अंधेरे के साथ जी रहे हैं। प्रशासन हालात काबू में लाने की कोशिश में है मगर प्रकृति की मार अभी थमी नहीं है।
बलागाड़ में रविवार को एक मकान क्षतिग्रस्त हो गया। लोगों ने 150 मकान खाली कर दिए हैं। परिवारों ने सुरक्षित जगह शरण ली है। कई परिवार रिश्तेदारों के घर रुके हैं। बंजार के थाटीबीड में 15, गोपालपुर 15, मरोड़ में 5, भियूली में 5, बलागाड़ में एक घर भूस्खलन से क्षतिग्रस्त हुआ है। सड़कें बंद होने से सबसे बड़ी समस्या राशन की हो गई है। लोगों के पास सुबह-शाम खाना बनाने के लिए राशन नहीं बचा है। बिजली न होने से मुश्किल और बढ़ गई है।लगातार दूसरे दिन हेलिकाप्टर से बंजार कस्बे में पांच क्विंटल से अधिक राशन पहुंचाया गया। बंजार के सोझा, मशियार में भी हेलिकाप्टर से राशन पहुंचाया गया। रसोई गैस सिलिंडर का स्टॉक भी खत्म हो चुका है। बंजार की मुख्य सड़क जब तक बहाल नहीं हो जाती है, तब तक लोगों को राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। प्रशासन के अधिकारियों की मानें तो बंजार की मुख्य सड़क को बहाल करने में दो दिन का समय अभी और लग सकता है।
प्रशासन प्रभावित लोगों की हरसंभव सहायता कर रहा है। सड़कें बाधित होने से राशन पहुंचाने में दिक्कत आ रही है। दुर्गम क्षेत्रों में हेलिकाप्टर के माध्यम से राशन पहुंचाया जा रहा है। - पंकज शर्मा, एसडीएम, बंजार
माेबाइल नेटवर्क भी ठप, नहीं हो पा रहा संपर्क
बंजार में मोबाइल नेटवर्क भी ठप है। मोबाइल नेटवर्क न होने न तो लोग अपनों से संपर्क साध पा रहे हैं। न ही अपने लिए सहायता मांग पा रहे हैं। मोबाइल पर बात करने के लिए कई किलोमीटर दूर आना पड़ रहा है।