नग्गर में हुई देव संसद में कुल्लू-मंडी जिलों के साथ लाहौल घाटी के 240 देवी-देवता पहुंचे
सुबह ही जुटने लगी थी लोगों की भीड़, सैलानियों ने भी किया देव परंपरा का अनुभव
कुल्लू से पहुंची अठारह करडू की धड़छ का हुआ स्वागत
चार घंटे तक चली कार्रवाई, जगती देखने को उमड़ी भीड़
संजय ठाकुर/शेरू बाबा
नग्गर/पतलीकूहल (कुल्लू)। देवभूमि हिमाचल की वादियों में शुक्रवार का दिन एक ऐतिहासिक और आस्था से भरा रहा। माता हिडिंबा के आदेश पर शुक्रवार को नग्गर में देव संसद का आयोजन हुआ।
इसमें कुल्लू, मंडी और जनजातीय क्षेत्र लाहौल के करीब 240 देवी-देवता निशान के साथ शामिल हुए। चार साल बाद नग्गर के जगती पट में हुई इस देव संसद पर सभी की नजरें टिकी थीं।
सैकड़ों देवी-देवताओं की मौजूदगी में हुए कार्यक्रम में सुबह 7:00 बजे से ही देवताओं के कारकून, हारियान और देवलू पहुंचने शुरू हो गए थे। देव संसद के साक्षी बनने के लिए आम लोगों के साथ सैलानी भी पहुंचे। सुबह से लेकर दोपहर करीब 2:00 बजे तक कुल्लू, मंडी और लाहौल के देवी-देवता निशान के साथ आते रहे। इसके बाद तय समय के अनुसार लगभग 10:45 बजे प्रक्रिया शुरू हुई। यह 3:00 बजे तक चलती रही।
जगती (देव संसद) का आदेश देवी हिडिंबा ने अक्तूबर में कुल्लू दशहरा के दौरान ढालपुर मैदान में दिया था। देवी ने प्रदेश में आपदा से हुए विनाशकारी नुकसान के निवारण के लिए इसका आयोजन करने का निर्देश दिया था। जगती पट मंदिर में विधिवत रीति-रिवाज से कारदार महेश्वर सिंह ने देव मर्यादाओं के अनुसार समस्त व्यवस्थाओं का संचालन किया। शुभारंभ के लिए परंपरानुसार कुल्लू राजघराने के सुल्तानपुर स्थित रूपी पैलेस से अठारह करडू की धड़छ को लाया गया। इसका यहां पहुंचने पर स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों, शहनाई और शंखध्वनि के बीच पूरा वातावरण श्रद्धा और भक्ति से गूंज उठा। स्थानीय लोगों के साथ देश-विदेश से आए सैलानियों ने भी देव परंपरा का अनुभव किया। जगती पट मंदिर के कारदार महेश्वर सिंह ने बताया कि कुल्लू घाटी में आपदा से हो रहे नुकसान के निवारण के लिए ही देव संसद बुलाई गई थी।