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Kullu News: एचपीएमसी ने सहेज लिए पेड़ों से गिरे सपने

Fri, 31 Oct 2025 10:12 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
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कुल्लू के बागवानों से सी ग्रेड का सेब 12 रुपये किलो खरीदकर दी राहत
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जिले में आठ कलेक्शन सेंटर खोलकर खरीदीं 44 हजार से अधिक बोरियां
खाते में पैसे की जगह कृषि उपकरण, खाद, दवाइयां भी ले सकते हैं बागवान
गौरीशंकर
कुल्लू। प्राकृतिक आपदा से तबाह हुए बगीचों के बीच जब बागवानों के चेहरे मुरझाने लगे थे, तब एचपीएमसी ने उन्हें सहारा दिया।
12 रुपये प्रति किलो की दर से सी-ग्रेड सेब खरीदकर इस संस्था ने न केवल किसानों को आर्थिक राहत दी, बल्कि यह भरोसा भी दिलाया कि गिरा हुआ सेब भी मायने रखता है।
हिमाचल प्रदेश मार्केटिंग कॉरपोरेशन ने किसानों के गिरे सी-ग्रेड के सेब को खरीदने के लिए मनाली से बंजार तक 8 कलेक्शन सेंटर खोले। इनमें यह सेब 12 रुपये प्रतिकिलो खरीदा। कलेक्शन सेंटर में अब तक 44 हजार 982 बोरियां खरीदी जा चुकी हैं। प्रति बोरी 35 किलोग्राम की पैकिंग में हैं। अभी खरीद जारी है। इससे यह आंकड़ा अभी बढ़ सकता है। गौरतलब है कि इस बार आपदा के चलते बागवानों का सेब समय पर मंडियों में नहीं पहुंच पाया है। इस कारण उनका सेब खेतों में ही पेड़ से गिरना शुरू हुआ था।
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यहां खोले हैं कलेक्शन सेंटर
जिले में मनाली से लेकर बंंजार तक क्षेत्र की बात करें तो इस क्षेत्र में एचपीएमसी ने आठ कलेक्शन सेंटर खोले हैं। यहां बागवानों से सी-श्रेणी का सेब 12 रुपये किलो खरीदा जा रहा है। इन संग्रह केंद्रों में पतलीकूहल, बंदरोल, दड़का, जरी, भुंतर, सैंज, बंजार और ज्वालापुर शामिल हैं। यहां बागवान पेड़ों से गिरे हुए सेब को लाकर एचपीएमसी को बेच रहे हैं।

धन या दवाइयां, उपकरण ले सकेंगे बागवान
एचपीएमसी को दिए सी-ग्रेड के सेब के बदले में बागवान धन के अलावा दवाइयां, खाद या फिर उपकरण भी ले सकते हैं। हालांकि एचपीएमसी सरकार से धन मिलते ही बागवानों के खातों में धन स्थानांतरित करेगी लेकिन उन्होंने किसानों को विकल्प के तौर पर खाद, उपकरण या दवाइयां उपलब्ध करवाने की व्यवस्था भी की है। जो दिसंबर महीने के शुरुआत में बागवानों को एचपीएमसी के विक्रय केंद्रों में उपलब्ध होंगे।
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एचपीएमसी ने बागवानों के सी-ग्रेड के सेब को खरीदने के लिए 8 केंद्र खोले हैं जहां बागवान सेब पहुंचा रहे हैं। इस बार अब तक 44 हजार से अधिक बोरियां खरीदी जा चुकी हैं। सरकार से धन मिलते ही उनके खातों में पैसे डाल दिए जाएंगे और किसान इसके बदले में दवाइयां, खाद या कैंची आदि उपकरण भी खरीद सकते हैं। - संजीव, क्षेत्रीय प्रबंधक, एचपीएमसी
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