सैंज की कनौन पंचायत के लिए 2017 में बनी उठाऊ सिंचाई योजना का नहीं मिल पाया लाभ
सिंचाई के लिए बारिश पर निर्भर किसान-बागवान, योजना के लिए जारी हुए थे करोड़ों रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
लारजी (कुल्लू)। सपनों की सिंचाई योजना बनी, बजट जारी हुआ, हैंडओवर भी हो गया लेकिन खेतों तक पानी आज तक नहीं पहुंचा। 2017 में तैयार उठाऊ योजना ने सैकड़ों बीघा जमीन को तर करने का वादा किया था लेकिन आठ साल बाद भी बागवान बादलों की तरफ ही देख रहे हैं।
कागजों में तो परियोजना पूरी है लेकिन जमीन पर पाइपलाइन सूखी है। ठेकेदार के अधूरे काम और विभागीय देरी के बीच किसान हर सीजन में नुकसान उठा रहे हैं। हरियाली का नक्शा तो बना, पर हकीकत में सूखे की लकीरें और गहरी हो गईं।
सैंज घाटी की कनौन पंचायत के लिए साल 2017 में उठाऊ सिंचाई योजना बनाई गई है लेकिन इसका किसानों-बागवानों को आठ साल बाद भी लाभ नहीं मिला है। पंचायत के खेत-बगीचे अभी भी सूखे हैं। परियोजना से खेतों और बगीचों तक एक बूंद पानी नहीं पहुंचा है।
एनएचपीसी ने उठाऊ पेयजल योजना के निर्माण के लिए करोड़ों का बजट जारी किया था। इसी बजट से यह परियोजना तैयार की गई थी। 2017 में जलशक्ति विभाग को इसे सौंप दिया लेकिन इसके बाद इस परियोजना के संचालन के लिए जलशक्ति विभाग ने दोबारा टेंडर लगाए थे लेकिन काम वर्तमान तक पूरा नहीं हुआ। इससे पंचायत के किसानों और बागवानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीण करतार, प्रदीप, सुमित, वेदराम, अशोक ने कहा कि उन्हें परियोजना बनने से उम्मीद थी कि अब खेतों और बगीचों का सूखा खत्म होगा और वे फसलों को बेहतर तकनीकों की मदद से उगा पाएंगे। उन्होंने कहा कि उम्मीदों पर पानी फिर गया है और हर साल आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उधर, जलशक्ति विभाग के सहायक अभियंता बीएस वर्मा ने कहा कि कमान क्षेत्र विकास योजना के तहत जिस ठेकेदार को काम सौंपा गया था। उसने काम अधूरा छोड़ा है। उन्होंने कहा कि अब दोबारा इसके लिए टेंडर किए जाएंगे।
कनौन पंचायत में बना पानी के कृषि-बागवानी का अस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है। साल 2017 में पंचायत के लिए उठाऊ पेयजल परियोजना तैयार हुई है लेकिन इसके बाद से अब तक जलशक्ति विभाग की लेटलतीफी के कारण खेतों और बगीचों तक पानी नहीं पहुंच पाया है। - लालचंद, स्थानीय निवासी
उठाऊ पेयजल योजना के तहत पंचायत की सैकड़ों बीघा भूमि को तर किया जाना है लेकिन साल 2017 से अबतक पानी की एक बूंद नहीं मिली है। खेतों और बगीचों के सूखा रहने से कृषि-बागवानी के कार्यों के लिए बारिश पर निर्भर रहना पड़ता है। समय पर बारिश न होने से किसानों-बागवानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। - नंदलाल, स्थानीय निवासी