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Kullu : कुल्लू के दो देवताओं ने खत्म कर दी शराब की लत, 'सर्वोपरि' आदेश का आज भी हो रहा है पालन

Mon, 30 Oct 2023 11:26 AM IST
दुष्यंत शर्मा राजीव नैय्यर, संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू

सार

बंजार उपमंडल के मार्कंडेय ऋषि और लगघाटी के देवता फलाणी नारायण ने लोगों की शराब पीने और धूम्रपान करने की लत खत्म का दी है। दोनों देवताओं ने अपने क्षेत्र में नशा करने वालों का आना-जाना वर्जित कर रखा है। बंजार उपमंडल के मम्जां गांव के ग्रामीण पौराणिक परंपराओं का बखूबी निर्वहन कर रहे हैं।
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देवता फलाणी नारायण - फोटो : संवाद
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विस्तार
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देवभूमि में देवी-देवताओं के आदेश कारकूनों और हारियानों के लिए सर्वोपरि हैं। पौराणिक परंपराओं और देव आदेशों का आधुनिकता के इस दौर में भी पालन किया जा रहा है। बंजार उपमंडल के मार्कंडेय ऋषि और लगघाटी के देवता फलाणी नारायण ने लोगों की शराब पीने और धूम्रपान करने की लत खत्म का दी है। दोनों देवताओं ने अपने क्षेत्र में नशा करने वालों का आना-जाना वर्जित कर रखा है। बंजार उपमंडल के मम्जां गांव के ग्रामीण पौराणिक परंपराओं का बखूबी निर्वहन कर रहे हैं।

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 देवता मार्कंडेय ऋषि (कोठी मंगलौर) का विशेष स्थान मम्जां गांव में है। देवता के आदेशानुसार यहां शराब का सेवन करना और पीकर आना पूरी तरह वर्जित है। अगर किसी व्यक्ति को मम्जां गांव से दूसरे गांवों में जाना हो, लेकिन शराब का सेवन कर रखा हो, ऐसे में उस व्यक्ति को गांव के बाहर से जाना पड़ता है। इसके लिए गांव के बाहर से आवाजाही के लिए अलग से रास्ता बना हुआ है।

गांव का कोई भी व्यक्ति किसी को आने से नहीं रोकता है। क्षेत्र और घाटी के लोगों को पता है कि देवता मार्कंडेय ऋषि के स्थान मम्जां में शराब पीकर प्रवेश करना वर्जित है। देवता के पुजारी जीवन शर्मा ने कहा कि देवता का मुख्य मंंदिर मंगलौर गांव में है, लेकिन देवता का स्थान मम्जां में है। इस गांव में शराब पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है।
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लगघाटी के डुपकण गांव के देवता फलाणी नारायण भी नशे के सख्त खिलाफ हैं। देवता को तंबाकू से इतनी नफरत है कि उनके मुख्य देव स्थल डुपकण गांव में तंबाकू, बीड़ी-सिगरेट घर के अंदर ले जाना भी निषेध है। देवता के हारियान  क्षेत्र में यह नियम लागू है। खास बात  यह है कि बीड़ी-सिगरेट, तंबाकू के अलावा शराब पर भी यहां पाबंदी है। देव आदेशों का कोई पालन नहीं करता है तो माना जाता है देवता उसे स्वयं दंडित करते हैं। 

मार्कंडेय ऋषि के गांव में लोग इस्तेमाल नहीं करते कुर्सी-टेबल...
देवता मार्कंडेय ऋषि के स्थान मम्जां गांव में शादी-विवाह और अन्य समारोहों में भी नशा करने पर रोक है। गांव में किसी भी मौके पर कोई भी व्यक्ति शराब का सेवन नहीं कर सकता है। इसके अलावा इस गांव के लोग कुर्सी और टेबल भी इस्तेमाल नहीं करते हैं। मान्यता है कि देवता के समक्ष ऊंचे आसन में बैठना देव परंपरा का उल्लंघन करना है।

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