गौरतलब है कि एक महीने तक देव कारकून भी कड़े देव प्रतिबंध में बंधे रहेंगे। जब तक देवी-देवता स्वर्ग प्रवास से वापस नहीं लौटेंगे तब तक मणिकर्ण घाटी के लोग बाल और नाखून नहीं काटेंगे।
लिहाजा, देव कारकून एक महीने तक तपस्या में लीन रहेंगे। वहीं एक महीने तक घाटी के मंदिरों में सुबह-शाम वाद्ययंत्रों की धुनें गूजेंगी। देव धुनें गूंजनी आरंभ हो गई हैं।
देव कारकूनों के अनुसार माघ महीने में मणिकर्ण घाटी के देवी-देवता स्वर्ग प्रवास पर जाते हैं। देवी-देवता स्वर्ग पर जाने से मंदिर भी सूने पड़ जाते हैं।
जैसे ही देवी-देवता स्वर्ग प्रवास पर निकलेंगे तो कारकूनों पर कई चीजों का देव प्रतिबंध रहेगा। एक महीने तक न तो कारकून बाल काटेंगे और न ही नाखून। इसके अलावा देवता के प्रमुख कार कारिंदे घर से बाहर भी नहीं रह सकते हैं।
कारकून लाल चंद, हुकम राम, होतम राम का कहना है कि बीस जनवरी को देवी-देवता स्वर्ग प्रवास पर निकलेंगे। उन्होंने बताया कि फाल्गुन मास की संक्रांति को देवी-देवता धरती लोक पर आएंगे। उन्होंने बताया कि तब तक मंदिरों में देव धुनें बजती रहेंगी। उन्होंने बताया कि एक महीने तक देवलु तपस्या में बैठेंगे।