कुल्लू। जिला कुल्लू की भौगोलिक स्थिति मैदानी इलाकों से काफी भिन्न है। ऐसे में वन्य जीवों को खोजना और आपातस्थिति में उन्हें रेस्क्यू करना वनरक्षकों के लिए चुनौतीपूर्ण रहता है। इन चुनौतियों से वनरक्षक किस तरह से निपट सकते हैं, इसका उन्हें प्रशिक्षण दिया गया।
वन्य जीव विभाग ने रविवार को मानव, वन्य जीव, वन संघर्ष पर प्रायोगिक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में जिलेभर के लगभग 25 वनरक्षकों ने भाग लिया।
कार्यशाला में वन्य जीव विभाग के सलाहकार सेवानिवृत्त डॉ. आरएस किश्तवाड़ मुख्य वक्ता रहे। उन्होंने वनरक्षकों को वन्य जीवों के संरक्षण, रेस्क्यू, उपचार की तकनीक बताई। इसके अलावा उन्होंने वनरक्षकों को वन्य जीव की मौत का पता लगाने के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। वन्य जीव विभाग के परिक्षेत्र अधिकारी राकेश ठाकुर ने कहा कि वन्य जीवों को रेस्क्यू करने में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
विभागीय अधिकारियों को मौके पर वन्य जीव की ओर से चोटिल किए जाने का खतरा रहता है। इसके अलावा उसे रेस्क्यू करते समय लोगों की भीड़, कम संसाधनों, रात के अंधेरे का सामना भी करना होता है। ऐसे में उनसे कोई चूक न हो, इसके लिए उन्हें सावधानी पूर्वक रेस्क्यू करने का प्रशिक्षण दिया।
डॉ. आरएस किश्तवाड़ ने कहा कि वनरक्षकों को वन्य जीव की सूचना मिलने के बाद संसाधनों, मौके की स्थिति, रेस्क्यू अभियान, उपचार और उसे दोबारा जंगल तक छोड़ने की विभिन्न तकनीकों से अवगत करवाया गया। संवाद
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