मकर संक्रांति के मौके पर मनाए जाने वाला माघी पर्व जिले में वीरवार को धूमधाम से मनाया गया। माघी पर्व पर जूब भी बांटी गई और इस दौरान जूब देकर अपने से बड़ों का आशीर्वाद लिया गया। गौरतलब है कि मकर संक्रांति को स्थानीय भाषा में माघ रा साजा भी कहा जाता है। माघी पर्व पर पारंपरिक व्यंजनों की महक से कुल्लू घाटी महक उठी। देसी घी, खिचड़ी, बबरू सहित अन्य व्यंजनों को मेहमानों को परोसा गया।
सुबह से शाम तक मेहमानों की खातिरदारी का दौर चलता रहा। वहीं, देवताओं को मकर संक्रांति के अवसर पर विशेष प्रकार के भोग लगाए गए। मणिकर्ण घाटी, बंजार, सैंज, आनी, मनाली, लगवैली और गड़सा आदि क्षेत्रों में कई जगह पर मकर संक्रांति की धूम रही। ऊझी घाटी के विजय कुमार, सोहन, खराहल घाटी के गिरधारी लाल, चमन और मणिकर्ण घाटी के गुरुदयाल सिंह ने कहा कि मकर संक्रांति का त्योहार जिले में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। प्रात:काल देवताओं की पूजा अर्चना की गई।
उसके बाद जूब बांटने का सिलसिला शुरू हुआ, जो देर सायंकाल तक चलता रहा। उन्होंने कहा कि जूब बांटने का सिलसिला अगले सात दिन तक चलता रहेगा। पारंपरिक व्यंजन देसी घी, खिचड़ी आदि भी इस दौरान मेहमानों को परोसे गए। एक माह के स्वर्ग प्रवास से लौटने के बाद देवताओं का भव्य स्वागत किया गया।