रोहतांग (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति की सिस्सू पंचायत में पर्यटकों को अब खाना डिस्पोजल प्लेट में नहीं, बल्कि टौर की पत्तल में परोसा जाएगा। टौर की यह पत्तलें हिमाचली धाम में खूब इस्तेमाल होती हैं।
पंचायत सिस्सू को सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए इस तरह की पहल शुरू की गई है। इसके आने वाले समय में बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे। पंचायत ने पर्यावरणीय स्थिरता और संरक्षण की दिशा में यह नई पहल करने का निर्णय लिया है।
जनता के स्वामित्व और जनता की ओर से संचालित पर्यटन (पीओपीजीटी) के अंतर्गत पीपल फॉर हिमालयन डेवलपमेंट और रॉयल एनफील्ड द्वारा समर्थित पंचायत पर्यटन विकास समिति (पीटीडीसी) और पीपल फॉर हिमालयन डेवलपमेंट (पीएचडी) ने पत्तल प्लेट्स को अपनाया है। गौर रहे कि जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में सिस्सू सैलानियों की पहली पसंद है। यहां सालभर सैलानियों का जमावड़ा रहता है। पारंपरिक पत्तलें बाहुनिया वल्लरी (टौर) के पत्तों से बनाई जाती हैं। यह हिमाचल के जंगलों में पाई जाती हैं। सोमवार को सिस्सू में आयोजित पीएचडी संस्था के कार्यक्रम में एसडीएम केलांग और डीटीडीओ रजनीश शर्मा ने इसका शुभारंभ किया।
एसडीएम रजनीश शर्मा ने पंचायत और इस कार्य में जुटीं विभिन्न संस्थाओं के दूरदर्शी दृष्टिकोण सराहना की। उन्होंने कहा कि इसका शानदार उदाहरण है कि कैसे समुदाय पर्यावरण की रक्षा और अपनी विरासत को संरक्षित करने के लिए नेतृत्व कर सकते हैं। पीएचडी के अविनाश और ललिता ने भी विचार रखे। इस दौरान प्रधान राजीव, उप प्रधान संदीप किंगोपा और सदस्य जितेंद्र कटोच, राजन, नीरज आदि मौजूद रहे।