मनाली (कुल्लू)। देश के कोने-कोने से आए सैलानियों को रोहतांग न जाने देने के कारण दूसरे दिन भी निराशा हाथ लगी है। वहीं प्रशासन भी असमंजस में पड़ गया है कि आधिकारिक तौर पर रोहतांग 15 नवंबर तक बंद हो जाता है और फिर भी सैलानियों को रोहतांग भेजा जाता है। कोई हादसा होता है तो फिर उसका जिम्मेवार कौन होगा। इसके लिए उपायुक्त कुल्लू और उपमंडलाधिकारी मनाली को माथा पची करनी पड़ रही है ।
हालांकि बुधवार को सैलानी सुबह कड़ाके की ठंड में जिला पर्यटन अधिकारी के कार्यालय के बाहर रोहतांग जाने के लिए परमिट लेने के लिए लाइनों में खड़े थे, लेकिन जैसे ही अधिकारी और कर्मचारी कार्यालय पहुंचे तो लोगों को जानकारी मिली कि रोहतांग जाने के लिए परमिट न ही कार्यालय द्वारा और न ही ऑनलाइन प्राप्त कर सकेंगे। वहीं कुछ सैलानी इस भ्रम में गुलाबा भी जा पहुंचे कि वहां पर उन्हें परमिट मिल जाएगा।
गुजरात से आए दिनेश भाई एवं परेश भाई ने बताया कि गुजरात से 35 परिवारों का एक ग्रुप मनाली घूमने आया है क्योंकि मनाली में रोहतांग में जाकर बर्फ का दीदार कर सकेंगे। यहां आकर पता चला कि रोहतांग जाने के लिए परमिट नहीं दिए जा रहे हैं। इसके चलते उन्हें निराशा हाथ लगी है। उन्होंने कहा कि उन्हें मालूम होता कि उन्हें रोहतांग जाने की इजाजत नहीं है तो उनका ग्रुप श्रीनगर चला जाता। उन्होंने बताया कि यदि बर्फ देखने के लिए रोहतांग जाने को नहीं मिलेगा तो कौन मनाली आएगा।
दिल्ली से आए नव विवाहित जोड़ा सुभाष और गीता ने बताया कि वे मनाली हनीमून मनाने के लिए आए हुए हैं। उन्होंने सोचा था कि रोहतांग में जाकर अपने हनीमून को यादगार बनाएंगे, लेकिन परमिट न दिए जाने कारण वे रोहतांग नहीं जा सके। इससे वे बहुत दुखी हैं।
एसडीएम मनाली ज्योति राणा ने बताया कि आधिकारिक तौर पर 15 नवंबर को रोहतांग पास बंद हो जाता है। इसके चलते रोहतांग जाने के लिए परमिट नहीं दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में पिछले दिनों दो बार रोहतांग पर अचानक भारी हिमपात हुआ, जिसके चलते देर रात तक प्रशासन द्वारा बचाव और राहत कार्य को अंजाम दिया गया। उन्होंने कहा कि प्रशासन विचार कर रहा है कि सैलानियों को केवल मढी तक जाने के परमिट दिए जाएंगे।