रोहतांग (कुल्लू)। लाहौल के अधिष्ठाता देवता राजा घेपन और देवी बोटी शनिवार को घाटी की परिक्रमा पर निकल पड़े हैं। दोनों देवी-देवता अब ढाई महीने तक घाटी की परिक्रमा पर रहेंगे। तीन साल बाद देवता राजा घेपन और माता बोटी श्रद्धालुओं को दर्शन और आशीर्वाद देने के लिए घाटी की परिक्रमा कर रहे हैं।
शनिवार सुबह 10:30 बजे देवता राजा घेपन ने माता जंगड्रुल केवग थान के साथ शाशिन में देवमिलन किया। देवमिलन देखने के लिए करीब 3,000 श्रद्धालु पहुंचे। दोपहर 12 बजे रोपसंग में देवता राजा घेपन का देवमिलन देवी बोटी से हुआ। इसके बाद दोनों देवी-देवता गुंचलिंग के लिए रवाना हुए।
शुलिंग के मोगर देवता, रालिंग के ड्राबला, खले के लुंगखोरबल, ट्रिलिंग के शलवर, गोंधला के मेलंग तेते, सक्कर के नागराजा और बिलिंग के तंगजर देवता भी गुंचलिंग पहुंचे। यहां सभी देवी-देवताओं का महामिलन हुआ, जिसके साथ ही क्यासंदोर शुरू हुआ। देवता राजा घेपन कमेटी के अध्यक्ष गोविंद ने कहा कि क्यासंदोर के दौरान देवस्थल गुंचलिंग में देवी-देवताओं के पास श्रद्धालु नहीं जा सकेंगे।
23 अक्तूबर को गुंचलिंग में महा मेला मनाया जाएगा। इसके बाद देवता राजा घेपन और देवी बोटी गोंधला, थोरंग तथा दालंग होते हुए पट्टन घाटी की परिक्रमा पर निकल पड़ेंगे। यह परिक्रमा ढाई महीने तक चलेगी। संवाद