दो हाईवे भी पड़े बंद, लोगों के लिए अब डर बन चुका है सड़कों पर पसरा सन्नाटा
सफर से कतराने लगे लोग, ग्रामीण सड़कों को बहाल करना किसी चुनौती से कम नहीं
रोशन ठाकुर
कुल्लू। जिले में अब रास्ते सिर्फ मंजिल तक नहीं ले जाते, बल्कि खतरे की ओर ले जा सकते हैं। बीते पांच दिनों से हो रही लगातार बारिश ने दो राष्ट्रीय राजमार्गों समेत 225 से ज्यादा सड़कों को भूस्खलन की गिरफ्त में ले लिया है।
कुल्लू-मनाली हाईवे के 23 स्थानों पर ब्यास नदी ने सड़क को लील लिया। एनएच-305 पर 150 से अधिक जगहों पर पहाड़ों का मलबा बिखरा पड़ा है। सड़कों पर पसरा सन्नाटा अब डर बन चुका है। लोग सफर से ज्यादा सुरक्षित लौटने की दुआ मांग रहे हैं। जिले में दो हाईवे हैं। दोनों की हालत बेहद खस्ता है।
40 किलोमीटर लंबा कुल्लूू-मनाली हाईवे तीन 23 जगहों पर ब्यास की चपेट में आया है। 97 किलोमीटर लंबे औट-बंजार-सैंज हाईवे-305 पर लगभग 150 जगहों पर भूस्खलन हुआ है। कई जगह हाईवे बैठ गया है। ग्रामीण इलाकों की सड़कों को बहाल करना लोक निर्माण विभाग के लिए चुनौती से कम नही है।
ऐसे-ऐसे पॉइंट सामने हैं जहां भूस्खलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। मनोहर लाल, धर्म सिंह, प्रेम सिंह, ओम प्रकाश और सुरेंद्र ठाकुर ने कहा कि मौसम खुलने पर भी सरकारी एजेंसियों के लिए एनएच के साथ ग्रामीण सड़कों को बहाल करना आसान काम नहीं होगा। बारिश और भूस्खलन ने कई सड़कों का स्वरूप बदल दिया है। एनएचएआई के रेजिडेंट इंजीनियर ने कहा कि कुल्लू-मनाली हाईवे तीन 2023 की आपदा से कहीं अधिक क्षतिग्रस्त हो गया है।
खड़ी रही मशीनरी, नहीं हो पाया राहत का काम
भारी बारिश के कारण बुधवार को भी जिले में राहत कार्य नहीं हो पाया। सीमा सड़क संगठन, एनएचएआई, लोक निर्माण विभाग, एनएच की मशीनरी खड़ी रही। बारिश और ब्यास नदी का जलस्तर बढ़ने से एनएचएआई कुल्लू से मनाली तक कोई काम नहीं कर पाया। बारिश और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए लोक निर्माण, बीआरओ ने भी किसी तरह का रिस्क नहीं उठाया। बिजली बोर्ड के कर्मचारियों के लिए भी बिजली को बहाल करना चुनौती बन गया है।