सदियाला के साथ ही दियाली का भी समापन
वाद्ययंत्रों के साथ देव परंपराओं का निर्वहन
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले में सदियाला के मौके पर मशालों की रोशनी से गांव जगमगा उठे हैं। सदियाला के मौके पर लकड़ी की मशालें निकाली गईं। देवी-देवताओं के पास वाद्ययंत्रों के साथ देव परंपराओं का निर्वहन किया गया। सदियाला के समापन के साथ ही दियाली भी संपन्न हो गई है।
पार्वती घाटी के पीणी में मंगलवार देर शाम देवता जौड़ा नारायण के भंडार से एक बड़ी मशाल निकाली गई। इस मशाल से अन्य मशालें जलाने के लिए खूब कशमकश हुई। माता चामुंडा के मंदिर से एक मशाल निकाली गई। इसके बाद दो गांवों के लोग मशालों के साथ एक स्थान पर आपस में मिले। देर रात को माता भागासिद्ध के मंदिर में इसी तरह सदियाला हआ। चौंग क्षेत्र में भी सदियाला हुआ। पार्वती घाटी के अन्य देवी-देवताओं सहित दियार, गड़सा घाटी के देवताओं के पास भी सदियाला पर्व मनाया गया। गौर रहे कि सदियाला मकर संक्रांति के सात दिन बाद मनाया जाता है। सदियाला तक जूब देकर बड़ों का आशीर्वाद लेने की परंपरा है। ग्रामीण नरेश कुमार और दिनेश ने कहा कि सदियाला में मशालों की रोशनी से गांव जगमगा उठे हैं। उन्होंने कहा कि पर्व का लोगों को खास तौर से इंतजार रहता है। लोगाें में इसको लेकर उत्साह देखने को मिला।
जिला देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष एवं माता दशमी वारदा के कारदार दोत राम ठाकुर ने कहा कि देवी-देवताओं के पास देव परंपराओं का निर्वहन किया गया है।