पतलीकूहल (कुल्लू)। जिले की ऊझी घाटी के शिरढ़ गांव में ऐतिहासिक शिरढ़ काहिका उत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस प्राचीन नरमेघ यज्ञ को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। तीन वर्ष बाद आयोजित हो रहे इस अनूठे पर्व में देवता काली नाग के आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। इस दौरान देवता काली नाग की जयकारों से पूरी ऊझी घाटी गूंज उठी।
27 मई से शुरू हुए काहिका उत्सव के तहत तीन जून तक विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे। वीरवार को दूसरे नरमेघ यज्ञ ‘हुलकी’ का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय परंपराओं के अनुसार प्राचीन रस्मों का विधिवत निर्वहन किया गया।
उत्सव के दौरान जगनाह री जाच और कुष्टू काहिका जैसी पारंपरिक रस्में निभाई गईं। वहीं, देवी-देवताओं की मौजूदगी में श्रद्धालुओं ने भव्य नाटी डाली। कारदार पुनित महंत ने बताया कि शिरढ़ काहिका केवल एक मेला नहीं, बल्कि देव संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि काली नाग देवता की कृपा से यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
मेला कमेटी अध्यक्ष आदर्श ठाकुर ने बताया कि इस बार भी काहिका उत्सव में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। देवता के दरबार में हाजिरी लगाने के लिए लोगों का लगातार तांता लगा हुआ है।