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Kullu News: ऊबड़-खाबड़ पगडंडी पर झूल रही जीवन की डोर

Mon, 26 May 2025 10:52 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
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सैंज घाटी के अतिदुर्गम गांव शाक्टी से घोड़े पर मरीज का उपचार के लिए ले जाते हुए।-संवाद
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आजादी के 78 साल बाद भी सड़क से नहीं जुड़ा गाड़ापारली पंचायत का एक भी गांव
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घोड़े पर निहारनी पहुंचाए शाक्टी के बीमार बुजुर्ग, 14 किमी सफर में लगे पांच से छह घंटे
ग्रामीण बोले- सरकार और प्रशासन की अनदेखी रोज होती है दुर्गम गांवों के लोगों की परीक्षा

महेंद्र पालसरा
सैंज/न्यूली (कुल्लू)। जिले की सैंज घाटी के दुर्गम गांवों के बाशिंदे ऊबड़-खाबड़ पगडंडियों के सहारे जीवन की जंग लड़ रहे हैं। घाटी की गाड़ापारली पंचायत का एक भी गांव आजादी के 78 साल बाद भी सड़क से नहीं जुड़ा है।
गांव में कोई बीमार हो जाए तो ग्रामीणों की चिंता और बढ़ जाती है। हालात ऐसे हैं कि बीमारी की हालत में मरीज को पीठ और घोड़े या फिर कुर्सी पर बांधकर 14 किलोमीटर दूर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। ऊबड़-खाबड़ रास्तों के बीच कई बार तो मरीज की जान पर बन आती है।
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दुर्गम गांव शाक्टी में भी सोमवार को 70 वर्षीय मरीज लाल सिंह को बीमारी की हालत में घोड़े पर निहारनी लाना पड़ा। शाक्टी से निहारनी तक करीब 14 किलोमीटर का सफर तय करने में पांच से छह घंटे लगे। इसके बाद मरीज को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सैंज पहुंचाया गया।
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सड़क सुविधा न होने से ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सरकार और प्रशासन की अनदेखी ग्रामीणों पर रोज भारी पड़ती है।
ग्रामीण निरत राम, हीराचंद और डाबे राम ने कहा कि पहाड़ी रास्ते से मरीज को कुर्सी, घोड़े या फिर पीठ पर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। गांव के पैदल रास्तों की हालत भी खस्ता है। गांव तक सड़क न पहुंचने से ग्रामीणों में सरकार के प्रति रोष है। पंचायत प्रधान यमुना देवी ने कहा कि शाक्टी गांव के बुजुर्ग लाल सिंह को घोड़े पर बीमारी की हालत में उपचार के लिए ले जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को जल्द पंचायत की ओर से ज्ञापन भेजा जाएगा। इसमें पंचायत के हर एक गांव को सड़क से जोड़ने की मांग की जाएगी।
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