लाहौल घाटी में 14,000 फीट की ऊंचाई पर बन रही हिमाचल की सबसे ऊंची खंडिप नहर
नाबार्ड से दूसरे चरण में जारी हुए 14.39 करोड़, पहले दौर में खर्च हुए हैं 7.38 करोड़ रुपये
तांदी और वारपा पंचायत 2,225 बीघा सूखी जमीन होगी सिंचित, 21 गांवों को होगा लाभ
अशोक राणा
केलांग (लाहौल-स्पीति)। लाहौल की घाटियों में नई कहानी जन्म ले रही है। यह पत्थरों पर नहीं, पानी पर लिखी जा रही है। जहां कभी खेतों की प्यास पुरानी हो चुकी थी, जहां हर बारिश एक अस्थायी राहत थी, वहां अब स्थायी समाधान की धार बहेगी।
समुद्रतल से 14,000 फीट की ऊंचाई पर हिमाचल की सबसे ऊंची नहर खंडिप नहर बन रही है। यह तकनीक, साहस और समय की सबसे कठिन परीक्षा है। यह वह नहर है जो बर्फ के बीच बहकर आएगी। पत्थरों को चीरकर रास्ता बनाएगी। तांदी और वारपा की 2,225 बीघा सूखी जमीन को हरियाली का नया नाम देगी। नाबार्ड से दूसरे चरण में स्वीकृत 14.39 करोड़ रुपये उस अधूरे वादे को पूरा करेंगे, जो आजादी से पहले किया गया था। अब 350 एमएम की आधुनिक पाइपलाइनें पहाड़ों में बिछ रही हैं। नहर का पानी मिलने से तांदी और वारपा पंचायत के 21 गांव लाभान्वित होंगे।
खंडिप नहर का निर्माण कार्य आजादी से पहले शुरू हुआ था। यह योजना लंबे समय से अधर में लटकी रही। अब स्थानीय विधायक की पहल से इस पर तेजी से काम हो रहा है। करीब 11.50 किलोमीटर लंबी इस नहर में 350 एमएम के पाइप बिछाए जा रहे हैं। प्रथम चरण में 7.38 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।
चार से पांच किलोमीटर तक पहाड़ काटकर नहर का निर्माण हो रहा है। यह अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले साल तक यह नहर पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगी।
वर्षों पुरानी खंडिप सिंचाई योजना जल्द पूरी होगी। इससे तांदी और वारपा पंचायत के सैकड़ों किसान लाभान्वित होंगे। विधायक प्राथमिकता से इस योजना में 14.39 करोड़ रुपये नाबार्ड के माध्यम से स्वीकृत करवाए हैं। इसके लिए मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री का आभार। - अनुराधा राणा, विधायक।