रघुपुर घाटी में खतरे के साये में जी रहे दो गांवों के 20 से अधिक परिवार
ग्रामीण बोले - भूस्खलन से फसलें तबाह, मक्की-राजमा का फसल भी तबाह
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। रघुपुर घाटी में भूस्खलन अब सिर्फ पहाड़ों की ढलानों तक सीमित नहीं रहा, अब यह छलाच गांव के आंगन तक पहुंच गया है। दो गांवों के 20 से अधिक परिवार लगातार गिरते पत्थरों और मलबे के साये में जी रहे हैं। फसलें तबाह हो चुकी हैं। जमीन बह गई है।
हर बीती रात अगले दिन की चिंता और भय लेकर आती है। ग्रामीण सरकार और प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं कि दो गांवों को बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
हालांकि दो दिनों से मौसम खुला है लेकिन अब भूस्खलन का खतरा बन गया है। बारिश के साथ साफ मौसम में भी भूस्खलन हो रहा है। इससे लोगों की चिंता बढ़ गई है। प्रभावित ग्रामीण टेड़ी सिंह, सतपाल ठाकुर, सागर दास, ललित ठाकुर, टेक सिंह, संतोष कुमार, तिलक राज और सागर दास ने कहा कि भूस्खलन वाली जगह से खड्ड बहती है। ऐसे में पत्थर और मलबा गिरने का क्रम जारी है। अभी भूस्खलन से गांव के लोगों की कई बीघा भूमि बह गई है। सेब के पौधों के साथ मक्की, राजमा आदि फसल भी तबाह हो गई है। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन को छलाच और निचले छलाच के दो गांवों को बचाने के लिए जल्द कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि गांवों के लिए खतरा बढ़ता ही जा रहा है। आने वाले समय में यह भूस्खलन कांडीबाग गांव के लिए खतरा बन सकता है। उधर, अतिरिक्त उपायुक्त अश्वनी कुमार ने कहा कि इसकी रिपोर्ट मांगी जाएगी। लोगों और गांवों की सुरक्षा करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।