बंजार (कुल्लू)। घाटी के पवित्र देवस्थल बाहु सौर में शनिवार को 12 बैसाख की पारंपरिक बारहे की जाच (मेला) मनाया गया। इस दौरान लोगों ने देवी-देवताओं से फल, अनाज और नगदी फसलों को ओलावृष्टि से बचाने की कामना की। देव कारकून ख्याली राम, महेंद्र सिंह, जगदीश, विनोद और कृष्ण देव ने बताया कि इस तरह का आयोजन 12 बैसाख और 12 आश्विन को होता है। हालांकि पहले यह तीन दिन तक चलती थी, अब एक दिन ही आयोजन किया जाता है।
इस अवसर पर घाटी के प्रमुख देवी-देवता श्रृंगा ऋषि, अनंत बालू नाग, मार्कंडेय ऋषि, त्रिपुरा बाला सुंदरी और लक्ष्मी नारायण अपने-अपने लाव-लश्कर और वाद्य यंत्रों के साथ पहुंचे। देवताओं ने क्षेत्र को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए परिक्रमा और आपसी मिलन किया।
श्रद्धालुओं ने नाटी का आनंद लिया। देवी देवताओं के दर्शन के लिए भी लोगों का तांता लगा रहा। मेले के दौरान गूरों ने खेल में आकर श्रद्धालुओं को सरसों देकर आशीर्वाद प्रदान किया। सभी देवी-देवता आपसी मिलन के बाद क्षेत्र की सुख-समृद्धि और प्राकृतिक प्रकोपों से रक्षा का संदेश देते हुए अपने-अपने मंदिरों के लिए लौट गए। संवाद