ब्यास नदी में आई बाढ़ से भवन और परिसर हुआ था क्षतिग्रस्त
किसानों-बागवानों को मिलती उपलब्ध होते हैं बीज-उपरकरण
संवाद न्यूज एजेंसी
पतलीकूहल (कुल्लू)। ब्यास नदी की बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुए फलोत्पादक मंडल के भवन की 20 लाख से मरम्मत की जाएगी। बरसात के समय विगत जुलाई माह में ब्यास नदी की बाढ़ में भवन के साथ परिसर को क्षति पहुंची थी।
अब इस भवन की मरम्मत की जाएगी। फलोत्पादक मंडल ने मरम्मत के लिए सरकार से सहायता की अपील की थी लेकिन सरकारी औपचारिकताओं के लंबा खीचने के चलते मजबूरी में अब मंडल को अपने निजी संसाधनों से लगभग 20 लाख रुपये की लागत से भवन की मरम्मत कार्य शुरू करना पड़ रहा है।
बता दें कि यह भवन न केवल बागवानों की गतिविधियों का केंद्र है, बल्कि जिले के लगभग 6,000 करोड़ रुपये के सेब, प्लम, नाशपाती, खुमानी, जापानी फल, बादाम और आड़ू जैसे फलों के कारोबार की नीति, नियम और योजना बनाने का भी मुख्य केंद्र है। कुल्लू फलोत्पादक मंडल बागवानों को कीटनाशक, फफूंदनाशक और ट्री स्प्रे ऑयल उपलब्ध करवाने के साथ उनके उत्पादों को मंडियों तक पहुंचाने के लिए परिवहन की व्यवस्था भी करता है। सेब या अन्य उत्पादों से लदे वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने की स्थिति में मंडल बागवानों को मुआवजा भी प्रदान करता है। इसके अलावा, बागवानी से जुड़ीं नई नीतियों या कानूनों के मसौदे तैयार करते समय अक्सर केंद्रीय कृषि-बागवानी मंत्रालय और संसदीय समितियां राय के लिए कुल्लू फलोत्पादक मंडल से संपर्क करती हैं। प्रतिनिधियों को दिल्ली बैठकों में आमंत्रित किया जाता है। यह संगठन बागवानों और सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करता है। कुल्लू फलोत्पादक मंडल कुल्लू जिले का सबसे बड़ा किसान-बागवान संगठन है जिसके लगभग चार हजार सदस्य हैं। नियमों के अनुसार, एक परिवार से केवल एक व्यक्ति को सदस्यता प्रदान की जाती है। इस संबंध में फलोत्पादक मंडल के अध्यक्ष प्रेम शर्मा ने कहा कि करीब 20 लाख की लागत से फलोत्पादक मंडल भवन की मरम्मत की जाएगी। उधर, मनाली के विधायक भुवनेश्वर गौड़ ने बताया कि फलोत्पादक मंडल भवन के नुकसान को लेकर मंडल का प्रतिनिधिमंडल उनसे मिला था। उन्होंने सरकार को इसकी मरम्मत का प्रस्ताव भेजा है।