शिक्षक शाम चार बजे के बाद बच्चों को दे रहे कोचिंग, अनुशासन की भी मिल रही सीख
मॉर्निंग असेंबली में सामान्य ज्ञान और अंग्रेजी की करवाई जा रही है खास तैयारी
अशोक राणा
केलांग (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय जिले के शकोली स्कूल ने साबित कर दिया है कि सरकारी स्कूल भी प्रतिभा और समर्पण से मिसाल बन सकते हैं। स्कूल के शिक्षक शाम चार बजे के बाद बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग देते हैं।
मॉर्निंग असेंबली में सामान्य ज्ञान और अंग्रेजी की खास तैयारी करवाई जाती है। कराटे जैसी आत्मरक्षा कक्षाएं भी बच्चों को आत्मविश्वासी बनाती हैं। यह स्कूल न केवल पढ़ाई, बल्कि जीवन की चुनौतियों से निपटने के लिए भी बच्चों को तैयार कर रहा है और जिले के लिए प्रेरणास्रोत बन चुका है।
प्रदेश में कई बार सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के शराब के नशे में होने के वीडियो वायरल होने से शिक्षा प्रणाली पर भी सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में लाहौल का राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय शकोली अनुशासन, गुणवत्ता और नवाचार की बदौलत उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आया है। यह स्कूल जिले का एकमात्र ऐसा स्कूल है जहां नियमित पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाई जा रही है। जिले में सबसे अधिक विद्यार्थियों वाले इस स्कूल में शिक्षक रोजाना शाम 4:00 से 5:00 बजे तक अतिरिक्त कोचिंग देते हैं। गर्मियों में यह समय दो घंटे बढ़ा दिया जाता है।
सुबह 9:00 से 10:00 बजे तक सामान्य ज्ञान और अंग्रेजी की विशेष तैयारी करवाई जाती है। मॉर्निंग असेंबली में रोज नए प्रश्न पूछे जाते हैं। अनुभवी शिक्षकों के साथ ऑनलाइन कक्षाएं भी बच्चों को विषय विशेषज्ञता दे रही हैं। पढ़ाई के साथ आत्मरक्षा पर भी जोर दिया जा रहा है। शारीरिक शिक्षक विनोद कराटे में ब्लैक बेल्ट हैं। बच्चों को निशुल्क कराटे का प्रशिक्षण दे रहे हैं। त्रिलोकनाथ स्कूल के कॉमर्स प्रवक्ता नरेश लाल रोजाना चार बजे के बाद शकोली स्कूल के बच्चों को गणित पढ़ाते हैं। विद्यार्थी दीपक, सिमरन और इशांत ने कहा कि इन कक्षाओं से उनकी तैयारी मजबूत हो रही है। उधर, उपायुक्त किरण भड़ाना ने कहा कि शकोली स्कूल का मॉडल पूरे जिले के लिए प्रेरणादायक है। जल्द स्कूल का दौरा कर बच्चों और स्टाफ से मिलने की बात की है।
बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने के लिए भी तैयार किया जा रहा है। क्षेत्र के कई युवा बीते वर्षों में भारतीय सेना में भर्ती होकर जिले का नाम रोशन कर चुके हैं। यह पहल उस परंपरा को और मजबूत करेगी। इस प्रयास में उनके अपने स्कूल के अलावा दूसरे स्कूलों का भी योगदान है। - रणबीर सिंह, प्रधानाचार्य, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल शकोली