दशहरा उत्सव की अस्थायी मार्केट में पर्यटक न आने से बिक्री में आई 50 फीसदी की कमी
कुल्लू के हथकरघा उद्योग से जुड़े कारोबारियों और बुनकरों के हाथ लगी निराशा
बोले- पहले आपदा ने धोया कारोबार, फिर खराब सड़कों ने रोकी खरीदारों की राह
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। दशहरा उत्सव की चमक पर इस बार आपदा का साया रहा। सड़कों की खराब हालत और लगातार बारिश से पर्यटक नहीं पहुंचे। इससे कुल्लवी शॉल और टोपी की बिक्री में 50 फीसदी तक गिरावट आई।
बुनकरों के चेहरों पर चिंता साफ झलक रही है। आपदा की मार जिले के बुनकरों पर भी पड़ी है। आपदा और सड़कों की दुर्दशा के कारण दशहरा के दौरान पर्यटकों की संख्या न के बराबर रही। दशहरा से लेकर दिवाली तक पर्यटक अस्थायी मार्केट में पहुंचता था और कुल्लवी टोपी, शॉल, स्टॉल, जुराबों की खरीद करता था। इस बार उम्मीद के मुताबिक खरीद नहीं हो पाई। इससे हथकरघा उद्योग से जुड़े कारोबारियों और बुनकरों को निराशा हाथ लगी है।
हालांकि इस बार अस्थायी मार्केट में कारोबारियों को दुकानें लगाने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है। आमतौर पर दशहरा से दिवाली तक 20 दिन ही अस्थायी मार्केट लगती थी। इस बार 32 दिनों का समय कारोबारियों को मिला है। दो नवंबर तक ढालपुर मैदान में अस्थायी मार्केट सजी रहेगी। गौर रहे कि पर्यटकों में कुल्लवी टोपी, शॉॅल का खास क्रेज रहता है। पर्यटक कुल्लू आने पर शॉल और टोपी खरीदना नहीं भूलते हैं।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत प्रदर्शनी मैदान में लगे स्टॉल में जाडू देवता सहायता समूह चौंग की मानदासी ने कहा कि लोगों का नुकसान आपदा में हुआ है। अभी तक सामान्य कारोबार हुआ है।
दशहरा के दौरान तीन दिन बारिश रही। सड़कों की दशा पहले ही खराब थी। पर्यटक और खरीदार दशहरा में नहीं पहुंचे। आपदा के चलते बुनकरों का कारोबार आधा रह गया है। कारोबार में इस बार 50 फीसदी की कमी आई है। - देवी सिंह, न्यू हिमाचल कोऑपरेटिव सोसायटी
आपदा से अभी लोग उभर नहीं पाए हैं। नुकसान के चलते लोगों ने खुलकर पैसा खर्च नहीं किया तो कारोबार पर असर पड़ा। अस्थायी दुकानें लगाने के लिए समय तो बढ़ाया गया लेकिन खरीदार कम आने से अभी तक 50 फीसदी ही कारोबार हो पाया। -हेमा, कुल्लू शॉल बदाह