मनाली-लेह मार्ग रिकॉर्ड समय में बहाल, बीआरओ ने फिर रचा साहस और सेवा का इतिहास
25 अगस्त से फंसे जीप-ट्रक चालकों को मिलेगी राहत, ऊझी घाटी के बागवानों के चेहरे खिले
संवाद न्यूज एजेंसी
मनाली। मनाली से लेह तक टूटी सांसों और थमी उम्मीदों के बीच बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) के जवानों ने फिर दिखा दिया कि जब इरादे फौलादी हों तो नदी-पहाड़ भी रास्ता छोड़ देते हैं।
समाहन में बह चुकी सड़क, दरकती चट्टानों और मलबे से जूझते हुए बीआरओ की 70 आरसीसी यूनिट ने महज कुछ ही दिनों में नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया। भारत माता के जयघोष के बीच जब सड़क जुड़ी तो सिर्फ रास्ता नहीं खुला, फंसे हुए सैकड़ों ट्रक, जीप चालकों और ऊझी घाटी के बागवानों के चेहरों पर राहत लौट आई।
बीआरओ ने विपरीत भौगोलिक परिस्थिति के बीच मनाली-लेह मार्ग को अस्थायी तौर पर बहाल कर दिया है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ चर्चा के बाद मंगलवार से वाहनों की आवाजाही शुरू होगी। मार्ग की बहाली पर बीआरओ के जवानों का जोश देखते ही बनता था। समाहन में जवानों ने भारत माता की जय के नारे लगाकर जोश भर दिया।
गौरतलब है कि 26 अगस्त को आई बाढ़ से मनाली-लेह मार्ग को भी नुकसान पहुंचा है। मनाली के समीप समाहन में लगभग 65 और 100 मीटर सड़क अलग-अलग जगह धंस गई थी। वशिष्ट चौक में 180 मीटर हिस्सा गायब हो गया है। बीआरओ को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। मशीनरी एक तरफ से ही पहुंच सकी। वशिष्ट चौक में महज तीन दिन में 180 मीटर सड़क बनाने के बाद समाहन के समीप 100 मीटर सड़क बनाना चुनौती थी। इसे बना लिया गया है। हालांकि पहाड़ी से पत्थर गिरने और भूस्खलन की आशंका के कारण सावधानी बरतने की जरूरत है। बीआरओ 70 आरसीसी के कमांडर गौरव ने बताया कि इसके लिए पहले नदी का रुख मोड़ा गया और फिर पहाड़ को काटकर सड़क बनाई गई। यह सबसे चुनौतीपूर्ण कार्य था। समाहन के दोनों पॉइंट महज दो दिन में तैयार किए गए। सड़क एकतरफा बनकर तैयार हुई है। मंगलवार को स्थानीय प्रशासन के साथ रणनीति बनाकर वाहनों की आवाजाही शुरू की जाएगी।