देव मिलन--कुल्लू में दशहरा उत्सव के दौरान देव मिलन का नजारा।-संवाद
कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव देव नियमों, परंपराओं और रस्मों से विश्व में विख्यात है। सदियों से चली आ रही परंपराओं का देवी-देवता अठारह करड़ू सौह में बखूबी निर्वहन कर रहे हैं। रोजाना देवी-देवता अपने अस्थायी शिविरों से निकलकर अधिष्ठाता रघुनाथ से मिलने पहुंच रहे हैं। इसी परंपरा का निर्वहन आनी के देवता कुई कंडा नाग ने सोमवार को किया। देवता अपने अस्थायी शिविर से कारकूनों और हारियानों के साथ भगवान रघुनाथ से मिलने पहुंचे।
देव मिलन की परंपरा का निर्वहन परंपराओं के अनुसार किया। वहीं, इससे पहले देवता अपने अस्थायी शिविर से हारियानों-कारकूनों और ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते-नाचते रघुनाथ के शिविर मेें पहुंचे। दोपहर करीब 1:30 से 2:15 बजे तक अठारह करड़ू सौह में देवता और कारकूनों एवं हारियानों का नृत्य आकर्षण का केंद्र बना रहा। देवता के पुजारी गोविंद राम ने कहा कि दशहरा में देवता कुई कंडा नाग देव परंपराओं का निर्वहन करते हैं। संवाद