कुल्लू दशहरा उत्सव के छठे दिन मौहल्ला उत्सव में भगवान रघुनाथ के अस्थाई शिविर में पहुंचे देवता
कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में पहुंचे पलदी घाटी के देवी-देवताओं को दशहरा उत्सव के छठे दिन भगवान रघुनाथ और राजा की चानणी तक नाचते गाते हुए लाया गया। बारिश के बावजूद घाटी के देवताओं को देवलुओं ने कंधे पर ढोल नगाड़ों की थाप पर चानणी तक लाया।
इस दौरान माल रोड पर देवी देवताओं के साथ आए हारियानों ने परंपरागत गीतों पर नृत्य किया। देव बड़ा छमाहू, करथा नाग सहित अन्य देवी-देवताओं को बारिश के बीच भगवान रघुनाथ के अस्थायी शिविर और राजा की चानणी तक लाया गया। इस दौरान उत्सव में आए लोगों के लिए देवी-देवताओं के आगे आचल रहे हारियानों का नृत्य आकर्षण का केंद्र बना। लोग एक ताल पर झूमते हुए नृत्य करते आगे बढ़ रहे थे।
इस नृत्य को देख माल रोड पर चल रहा हर व्यक्ति रुक सा गया और इस नृत्य को देखता रह गया। ढोल नगाड़े, करनाल, रणसिंगे की ध्वनि पर गूंजे परंपरागत गीतों पर हारियानों ने देवता को भी नचाते हुए लाल चंद प्राथी कलाकेंद्र गेट तक लाया। हारियानों का नृत्य कुछ ऐसा था कि करीब पांच सौ मीटर की सड़क को चलने में करीब आधे घंटा का समय लग गया। उसके बाद भगवान रघुनाथ के शिविर और राजा की चानणी के पास हाजिरी भरने के बाद देवी-देवता फिर वापस लौटे।