न्यूली/सैंज (कुल्लू)। सैंज घाटी की दुर्गम ग्राम पंचायत गाड़ापारली के ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पंचायत के लिए बना पैदल पुल करीब दस साल पहले एचपीपीसीएल की 100 मेगावाट की परियोजना के बांध में डूब गया था। इसके बाद निहारनी नामक स्थान पर अभी तक नए पुल का निर्माण नहीं हो पाया है। पुल न होने से ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर न्यूली खड्ड को पार करना पड़ रहा है या तीन किलोमीटर का अतिरिक्त सफर करना पड़ रहा है। इससे समय के साथ उन्हें अन्य कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं, स्थानीय पंचायत निवासी निमत राम, आलम चंद, सोम कृष्ण, रामलाल ने कहा कि निहारनी में एचपीपीसीएल की 100 मेगावाट की परियोजना के बांध में पैदल पुल डूब गया था। इसकी जगह नया पुल करीब दस साल से नहीं बना है। इस वजह से निहारनी, लपाह, शाक्टी, मैल और मरौड़ के हजारों लोगों को रोज परेशान होना पड़ता है। उन्होंने कहा कि प्रशासन, परियोजना और ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क प्रबंधन के समक्ष कई बार मामले को उठाया गया है लेकिन समस्या का हल नहीं हो पाया है। उन्होंने सरकार, प्रशासन, परियोजना व पार्क प्रबंधन से पुल का निर्माण करने की मांग की है। उधर, ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के डीएफओ सचिन शर्मा ने कहा कि पार्क प्रबंधन ने बजट की राशि परियोजना को वापस लौटा दी है। बजट लौटाकर पार्क प्रबंधन ने परियोजना प्रबंधन से स्वयं पुल का निर्माण करने का आग्रह किया है ताकि जनता को फायदा मिल सके।
ग्राम पंचायत गाड़ापारली ने कई बार समस्या का समाधान करवाने के लिए प्रशासन, परियोजना और ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क प्रबंधन से आग्रह किया लेकिन निहारनी में दोबारा पुल का निर्माण हो पाया है।
-युमना देवी, प्रधान ग्राम पंचायत गाड़ापारली
निहारनी में पैदल पुल न होने की वजह से सबसे अधिक परेशानी बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों को न्यूली खड्ड पार करने के लिए तीन किलोमीटर अतिरिक्त पैदल सफर करना पड़ रहा है।
-रमेश धामी, वार्ड सदस्य मैल