मनाली-लेह मार्ग पर दालंग, छुरपक, स्तींगरी के पास सड़क के आसपास दौड़ते देखे जा रहे आईबैक्स
पर्यटकों ने लीं तस्वीरें, वन विभाग के साथ महिला मंडलों ने भी संभाला सुरक्षा को लेकर मोर्चालाहौल घाटी में पिछले दो दशकों से सामने नहीं आया है अवैध शिकार का कोई भी मामला
दिनेश जस्पा
उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। शीत मरुस्थल के पहाड़ में कल-कल करते झरने और नाले जमने शुरू हो गए हैं। ऐसे में 10 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर विचरने वाले वन्य जीव-जंतुओं ने रिहायशी और नदियों का रुख कर लिया है।
खासकर आईबैक्स (टंगरोल) को मनाली-लेह मार्ग पर दालंग, छुरपक, स्तींगरी के समीप सड़क और इसके आसपास दौड़ते देखा जा सकता है। घाटी में आने वाले पर्यटक इन प्राणियों को कैमरे में कैद कर रहे हैं। हिमालय क्षेत्र में पाया जाने वाले यह प्राणी पर्यटकों को बरबस अपनी ओर खींच रहा है। वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी भी इनकी सुरक्षा को लेकर कड़ी निगरानी रख रहे हैं। घाटी की महिला मंडल भी वनों के साथ वन्यजीव-जंतुओं की सुरक्षा के लिए मोर्चा संभाले हुए हैं। वन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक घाटी में करीब दो दशकों से अवैध शिकार का एक भी मामला सामने नहीं आया है।
लाहौल में घूमने आने वाले पर्यटकों के लिए खुशखबरी है कि 10 हजार फीट की ऊंचाई पर विचरण करने वाले आईबैक्स (टंगरोल) इन दिनों करीब से देख सकते हैं और अपने कैमरे में कैद भी कर सकते हैं। चंडीगढ़ से लाहौल घूमने आए पर्यटक मयंक और अश्विन ने बताया कि उन्होंने दालंग गांव के समीप एक आर्टिफिशियल आईबैक्स को सड़क के किनारे देखा तो वह इस प्राणी के कायल हो गए। उन्हें सोमवार को स्तींगरी से आगे सड़क पर आईबैक्स दौड़ते दिखे तो हमारी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। यह प्राणी सीधी खतरनाक पहाड़ी पर इतने आसानी से भागते नजर आए जो सच में कुदरत का करिश्मा ही कहा जा सकता। बता दें कि पहाड़ जमने से आईबैक्स को घाटी के कई हिस्सों में देखा जा रहा है। वन मंडलाधिकारी लाहौल इंद्राजीत सिर्रा ने कहा कि ठंड से पहाड़ में झरने और नाले जमने लगे हैं। ऐसे में ये प्राणी प्यास बुझाने निचले क्षेत्रों की ओर आ रहे हैं। वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी इन पर कड़ी नजर रखे हैं।