बाह्य सराज के गांवों में निभाई जा रही महाशिवरात्रि पर्व की सदियों पुरानी परंपरा
जिले में ढोल-नगाड़ों के राग पर जतियों से भगवान शिव काे खुश कर रहे ग्रामीण
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। 15 फरवरी को मनाए जाने महाशिवरात्रि पर्व के लिए जिले के लोगों में उत्साह है। उत्सव को यादगार मनाने के लिए बाह्य सराज के लोगों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
हालांकि महाशिवरात्रि को अभी छह दिन का समय है लेकिन लोग ढोल-नगाड़ों के राग पर जतियों को गाकर भगवान शिव को खुश कर रहे हैं। इसके लिए गांव दर गांव नाच गाने का दौर शुरू हो गया है।
ग्रामीण रात भर महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की महिमा का गुणगान कर रहे हैं। ग्रामीण ढोल-नगाड़ों, चिमटा, कांसी और अन्य वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि के साथ सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। ग्रामीण घर-घर जाकर महाशिवरात्रि पर्व पर जति गाकर मनोरंजन कर रहे हैं। इसमें गांव के बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सभी शामिल हो रहे हैं। शाम ढलते ही गांव के लोग किसी एक घर में एकत्रित होकर रातभर भोलेनाथ की महिमा की प्रस्तुति दे रहे हैं। रघुपुर घाटी के गांव बनाला, लोट, कोट, जुहड़, फनौटी, बिशलाधार, बालू, डोहाड़, सुहल, पकरेड के साथ पूरी घाटी में शिवरात्रि के पर्व को लेकर दौर शुरू हो गया है।
हंस राज, अशाेक ठाकुर, बेली राम, संजय कुमार, किशोरी लाल, झाबे राम और मान सिंह ने कहा कि बाह्य सराज की महाशिवरात्रि पर्व को हिमाचल में सबसे अलग तरीके से मनाया जाता है। यहां न केवल ग्रामीण भगवान शिव को खुश करते हैं, बल्कि आपसी भाईचारे और एकता का भी संदेश देते हैं।
कैंमटू की माला का होगा पूजन
बाह्य सराज आनी-निरमंड में सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। लोग कैंमटू की माला बना इसकी भगवान के शिव के रूप में पूजा-अर्चना करते हैं। ग्रामीण इसी माला की पूजा कर सुख-शांति और समृद्धि का आशीर्वाद लेते हैं।