सरकार ने मलाणा खड्ड पर पुल बना दिया होता तो शायद बच जाती अनमोल जिंदगी
लोग बोले- पिछले साल बादल फटने से आई आपदा में बह गया था गांव में बना पुल
सरकार और प्रशासन ने नहीं सुनी तो ग्रामीणों ने खुद ही बना दी थी लकड़ी की पुलिया
रोशन ठाकुर
कुल्लू। ऐतिहासिक मलाणा गांव के लोगों का दर्द न सरकार दूर कर पाई है और न ही प्रशासन कुछ कर पाया है। आपदा के 10 महीने बाद भी सरकार और प्रशासन का दावों का मरहम और वादों का पुल एक अनमोल जिंदगी निगल गया।
अगर पुल बन गया होता तो शायद दोनों युवक उफनती खड्ड में नहीं गिरते। पानी के तेज बहाव में बहे एक युवक का शव मिल गया है, जबकि दूसरा युवक लापता है। उसकी तलाश जारी है। एक अगस्त 2024 को मलाणा में बादल फटा था। दस महीने बाद भी मलाणा के लोगों का जनजीवन पटरी पर नहीं लौटा है। वीरवार आधी रात को भी मलाणा गांव के लोगों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। राशन लेकर घर जा रहे गांव के दो युवक पुलिया से अनियंत्रित होकर खड्ड में जा गिरे। यह पुलिया भी ग्रामीणों ने खुद ही बनाई थी। पिछले साल बादल फटने से यहां बना पुल बह गया था। मलाणा का संपर्क देश-दुनिया से कट गया था। इसके बाद सरकार और प्रशासन ने सुध नहीं ली तो लोगों ने खुद ही लकड़ी की पुलिया बना ली। आज भी ग्रामीण इसी पुलिया से आवाजाही कर रहे हैं। मलाणा गांव करीब 2500 की आबादी वाला दुर्गम गांव है। लोग कह रहे हैं कि अगर पुलिया की जगह पुल होता तो शायद मलाणा के युवक को जान नहीं गंवानी पड़ती। उधर, एसडीएम कुल्लू विकास शुक्ला ने कहा कि यहां पर पुल बनाना प्रस्तावित है। जल्द ही इसकी प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा।
पांच किमी तक खच्चरों और पीठ पर ढोना पड़ता है राशन
मलाणा पंचायत के प्रधान राजू राम और पूर्व प्रधान भागी राम ने कहा कि लोग 10 माह से चार से पांच किलोमीटर पैदल चलने पर मजबूर हैं। उन्हें पीठ पर या घोड़े-खच्चरों पर राशन ढोना पड़ रहा है। भागी राम ने कहा कि शासन और प्रशासन ने बड़े-बड़े वादे और दावे तो किए, मगर धरातल पर कुछ नहीं हुआ। लोगों को 10 महीने से पुल और सड़क की सुविधा नहीं मिली है। ग्रामीणों के मुताबिक प्रशासन ने यहां चल रहे एक बिजली प्रोजेक्ट को पुल का निर्माण करने काे कहा था, बावजूद पुल नहीं बन पाया।
10 माह से मलाणा नहीं पहुंच पाए सैलानी
मलाणा में बादल फटने के बाद ऐतिहासिक गांव में पर्यटन कारोबार भी चौपट हो गया है। गांव में करीब 50 से अधिक होटल और होमस्टे बने हैं। सड़क सुविधा के साथ नालों और खड्डों पर पुल नहीं होने से पर्यटकों ने भी यहां से किनारा कर लिया है। विदेशी और दक्षिण भारत के सैलानियों से गुलजार रहने वाला मलाणा में सन्नाटा पसरा है। पूर्व प्रधान भागी राम ने कहा कि बादल फटने के बाद से मलाणा का जनजीवन पूरी तरह से पटरी पर नहीं आने से सैलानी भी नहीं आ रहे हैं।