मजदूर परेशान, जिले के छह ब्लॉक में खड़ी हो गई है 5 करोड़ रुपये की देनदारी
केंद्र और राज्य सरकार से फंड न आना बताया जा रहा भुगतान न होने का कारण
गौरी शंकर
कुल्लू। जिले में मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों को छह महीने से दिहाड़ी का भुगतान नहीं हो पाया है। मजदूरों के साथ मिस्त्री भी दिहाड़ी का इंतजार कर रहे हैं। निर्माण सामग्री की भी 15 करोड़ की देनदारी खड़ी हो गई है।
दिहाड़ी न मिलने से मजदूर परेशान हैं। घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। 15 करोड़ की देनदारी में में 7 करोड़ 63 लाख मजदूरों की दिहाड़ी की राशि बनती है। यह नवंबर से अब तक की है। मिस्त्री की दिहाड़ी के करीब 50 लाख रुपये बनते हैं। मनरेगा कार्य में इस्तेमाल हुई निर्माण सामग्री की 6 करोड़ 82 लाख की राशि पेंडिंग है।
जिले के छह ब्लॉकों में मजदूर, मिस्त्री और अन्य देनदारी में आनी ब्लॉक में ही 4 करोड़ 96 लाख, बंजार 3 करोड़ 67 लाख की राशि लंबित है। भुंतर में 1 करोड़ 5 लाख, कुल्लू में 91 लाख, नग्गर 1 करोड़ 28 लाख की राशि पेंडिंग है। निरमंड ब्लॉक में 3 करोड़ 20 लाख की राशि का भुगतान लटका है।
जानकारों की मानें तो पहली मई को मजदूर दिवस मनाया गया। सरकार और प्रशासन के स्तर पर मजदूर हितों की पैरवी के ढोल तो खूब पीटे गए, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना में मजदूरों को दिहाड़ी न मिलने से सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
उधर, जिला परियोजना अधिकारी ग्रामीण विकास अभिकरण कुल्लू जयवंती ठाकुर ने कहा कि मनरेगा का फंड राज्य और केंद्र से आता है। अभी तक फंड नहीं आया है। इस कारण मनरेगा मजदूरों, मिस्त्री का भुगतान नहीं हो पाया है। बजट का प्रावधान होते ही पेमेंट जारी कर दी जाएगी।