घाटी के शिक्षक छेप राम ने अपने ही घर को बनाया संग्रहालय
संस्कृति को पुस्तक में ढाला, अब लाहौल के इतिहास पर लिखेंगे पुस्तक
अशोक राणा
केलांग (लाहौल-स्पीति)। कुकुमसेरी में शिक्षक छेप राम ने अपने घर को सिर्फ छत और दीवारें नहीं, बल्कि लाहौल की पुरातन संस्कृति का जीवंत संग्रहालय बना दिया है।
पुरानी वस्तुएं, वाद्ययंत्र, पारंपरिक पोशाक और औजार अब केवल इतिहास नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के लिए सीख बन गए हैं। संग्रहालय के साथ उन्होंने घाटी की संस्कृति पर पुस्तक भी लिखी है ताकि विरासत सिर्फ सहेजी नहीं जाए, बल्कि पढ़ाई और समझाई भी जाए।
उन्होंने पूरी वस्तुओं को सहेज कर रखा है। इनमें अधिकतर ऐसी वस्तुएं हैं जो लुप्त हो चुकी हैं या लुप्त होने के कगार पर हैं। पेशे से सरकारी स्कूल में हिंदी विषय के प्रवक्ता छेप राम घाटी की सांस्कृतिक विरासत को बचाने का काम कर रहे हैं।
उन्होंने शिक्षक रहते घाटी की संस्कृति के संरक्षण के लिए सिर्फ संग्रहालय ही नहीं खोला, बल्कि यहां की संस्कृति को किताब में सहेजने का भी काम किया है। संगला बौद्ध कला मंच का सृजन कर यहां की कला-संस्कृतिक को राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का भी काम किया है। वर्ष 2016 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यहां की संस्कृति को ओडिशा में प्रदर्शित कर चुके हैं। राष्ट्र स्तर पर जबलपुर, जांस्कर सहित कई स्थानों में कलामंच के कलाकारों की ओर से प्रस्तुतियां दी जा चुकी हैं।
संग्रहालय में सुरक्षित वस्तुएं
ट्राइबल म्यूजियम नाम से खोले गए छेप राम के संग्रहालय में पुराने समय में रसोई में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं के अलावा पहनावे के कुर्ता पाजामा, पूलें, टोपी, कृषि के औजार, हैंडलूम के उपकरण, मेडिकल पद्धति के उपकरण, ज्वेलरी, वाद्ययंत्र, पुस्तकें मौजूद हैं।
घाटी की संस्कृति पर लिखी पुस्तक उदयपुर स्कूल में तैनात शिक्षक ने घाटी की संस्कृति पर एक पुस्तक लिखी है। संस्कृति के सात अध्याय-लाहुल भाग एक नाम की पुस्तक हाल ही में शिमला के गेयटी थिएटर में विमोचित की गई है। इसमें घाटी की संस्कृति को संरक्षित करने का काम किया गया है। इससे पहले छेप राम ने हडूका की मौत नाम का काव्य संग्रह भी प्रकाशित किया है।
संस्कृति संरक्षण के साथ सीख भी
छेप राम घाटी की संस्कृति का सिर्फ बचाने का ही नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को पुरानी संस्कृति को सिखाने का काम भी कर रहे हैं। संस्कृति के जो पहलू गायब हो चुके हैं। वह युवा पीढ़ी को इस संग्रहालय में पढ़ने और देखने को मिल रहे हैं। उनका कहना है कि घाटी की सांस्कृतिक विरासत को बचाना हर व्यक्ति का काम है। वर्ष 2016 से इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं।