उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। तीन अक्तूबर 2020 में बन कर तैयार हुई अटल टनल रोहतांग से लाहौल-कुल्लू के बीच सफर आरामदायक और सुहाना हो गया है। मगर तांदी जीरो प्वाइंट से लेकर थिरोट और वहां से आगे उदयपुर से लाहौल के अंतिम गांव तिंदी तक डबललेन सड़क का कार्य ठंडे बस्ते में है। इस मार्ग पर सफर करना दिन प्रतिदिन मुश्किल होता जा रहा है।
लाहौल के उदयपुर तक पर्यटकों की संख्या में धीरे-धीरे इजाफा भी हो रहा है। इस वनवे सड़क के कारण कई हिस्सों में सड़क इतनी संकरी है कि वाहनों की पासिंग भी नहीं हो पाती है। इस कारण यहां ट्रैफिक समस्या भी उत्पन्न होने लगी है। इस मार्ग पर सबसे अधिक समस्या शांशा और कीरतिंग के बीच रहती है। यहां पर वाहन को पास देना सबसे बड़ी चुनौती है।
तंग सड़क के चलते वाहनों को पासिंग के दौरान आगे-पीछे वाहन करने को लेकर वाहन चालकों की आपस में तू-तू, मै-मैं होना आम बात है। आलू, मटर, सब्जी व सेब सीजन शुरू होने पर यह समस्या और भी विकराल हो जाती है। लाहौल के पट्टन घाटी के लोग तांदी जीरो प्वाइंट से लेकर तिंदी तक सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के अधीन इस सड़क के डबललेन होने की राह देख रहे हैं। मगर टनल बनने के बाद भी यह इंतजार लंबा होता जा रहा है।
एक तरफ जहां लाहौल में पर्यटन विकसित करने के बड़े-बड़े दावे हो रहे हैं, लेकिन पट्टन घाटी की ओर सड़क को डबललेन करने की दशा में कुछ भी नहीं हो रहा है। त्रिलोकनाथ में भगवान त्रिलोकीनाथ तो उदयपुर में विश्व प्रसिद्ध मां मृकुला देवी का मंदिर है। इन मंदिर की दर्शन के लिए काफी श्रद्धालु आते हैं, लेकिन सिंगल सड़क पर उन्हें आवाजाही करने में परेशानी रहती है।
उदयपुर में तैनात बीआरओ के कमांडिंग आफिसर (94 आरसीसी) मेजर सीपी विसाग ने बताया कि डबललेन सड़क बनाने के लिए अभी वन मंजूरी और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है।