कुल्लू। राजकीय प्राथमिक पाठशाला में खीर खाने से बच्चों के बीमार होने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से स्कूल में इस्तेमाल हुई खाद्य सामग्री के भरे सैंपल में चीनी के सैंपल फेल हो गए हैं। विभाग की टीम ने स्कूल में खीर बनाने के लिए इस्तेमाल की गई चीनी सहित पानी और अन्य वस्तुओं के सैंपल लिए थे और इनके नमूने कंडाघाट भेजे गए थे। बुधवार को प्रशासन के पास इसकी रिपोर्ट पहुंच गई है। इसमें हालांकि पानी और अन्य खाद्य वस्तुओं की जांच रिपोर्ट सही पाई गई है लेकिन चीनी गुणवत्ता की कसौटी पर खरी नहीं उतर पाई है। अब प्रशासन और विभाग की ओर से बनाई गई जांच कमेटी इस बात का पता लगाने में जुट गई है कि बच्चों का स्वास्थ्य खराब होने में चीनी मुख्य कारण रहा है या फिर कुछ और भी कारण शामिल रहे हैं। इस बात का भी पता लगाया जा रहा है कि स्कूल में इस्तेमाल होने वाला यह सामान कहां से खरीदा था।
स्कूल लौटने लगे विद्यार्थी
स्कूल में तैनात तीन अध्यापकों को हटाने के बाद बुधवार से विद्यार्थी स्कूल लौटने लगे हैं। गौरतलब है कि मामले में विभाग ने संज्ञान लेते हुए स्कूल में तैनात मुख्याध्यापक सहित तीन अध्यापकों को इस स्कूल से हटाकर क्लस्टर भेज दिया है। उसके बाद से बच्चे स्कूल लौटने लगे हैं क्योंकि अभिभावकों ने भी स्टाफ को बदलने की मांग की थी। स्थानीय निवासी देवेंद्र सोनी ने बताया कि बुधवार को दस से अधिक बच्चे स्कूल पहुंचे थे।
मामले में उपमंडलाधिकारी मनाली ने स्कूल में तैनात मिड-डे मील वर्कर को मनाली तलब किया था। यहां उनके बयान दर्ज किए गए हैं। इसके साथ ही एसएमसी अध्यक्ष के भी बुधवार को बयान दर्ज किए गए हैं। मामले की जांच का जिम्मा संभाले उपमंडलाधिकारी मनाली गुंजीत चिम्मा ने बताया कि चीनी के सैंपल की रिपोर्ट गुणवत्ता पर खरी नहीं उतरी है जबकि मामले में जांच पूरी की जा चुकी है। अब जांच रिपोर्ट और खाद्य वस्तुओं की लैब जांच रिपोर्ट को कंपाइल किया जा रहा है। उसके बाद आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।