खाना पकाने, पानी गर्म करने तथा अन्य दैनिक कार्यों में पारंपरिक ईंधन के बजाय सौर ऊर्जा के अधिक से अधिक प्रयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुक्रवार को देव सदन में कार्यशाला का आयोजन किया गया।
हिम ऊर्जा द्वारा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में कुल्लू जिले के विभिन्न शिक्षण संस्थानों, विभागों के अधिकारियों, स्वयंसेवी संस्थाओं के पदाधिकारियों और सौर ऊर्जा उपकरणों के कारोबार से जुड़े लोगों ने भाग लिया। कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के परियोजना निदेशक डॉ. आरपी गोस्वामी ने कहा कि पारंपरिक इंधनों के अंधाधुंध प्रयोग से होने वाले प्रदूषण ने विश्व के समक्ष कई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इसलिए अब बड़े पैमाने पर ऊर्जा के नवीन एवं नवीकरणीय स्रोतों का रुख करने की आवश्यकता है। इसके लिए सरकार भारी सब्सिडी प्रदान कर रही है। डॉ. गोस्वामी ने बताया कि सौर उपकरणों पर केंद्र सरकार पहाड़ी राज्यों के उपभोक्ताओं के लिए साठ प्रतिशत सब्सिडी दे रही है। इसके अलावा यूएनडीपी के पर्यावरण फंड से भी 15 फीसदी सब्सिडी दी जा रही है। यानी हिमाचलवासी कुल 75 सब्सिडी पर ये उपकरण खरीद सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए मंत्रालय के टॉल फ्री नंबर 18002334477 पर भी संपर्क किया जा सकता है। यूएनडीपी पर्यावरण फंड के राष्ट्रीय परियोजना प्रबंधक डॉ. एके सिंघल ने कहा कि विभिन्न संस्थानों, संस्थाओं व अन्य प्रतिष्ठानों के सामुदायिक भोजनालयों में सौर ऊर्जा का प्रयोग किया जाना चाहिए।
हिम ऊर्जा के सीईओ कंवर बीपी सिंह ने सभी वक्ताओं का स्वागत किया। इस मौके पर डॉ. महेश पटांकर ने भी सौर उपकरणों और संयंत्रों से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। इस अवसर पर सैंज जलविद्युत परियोजना के जीएम सतीश ठाकुर ने भी अपने विचार रखे। हिमऊर्जा के अधिकारी विनीत सूद ने सभी वक्ताओं तथा प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।