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Kullu News: खेत-खलिहानों में किसानों की फसलों को बर्बाद कर रहे लावारिस

Wed, 10 Dec 2025 04:28 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
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जिला की रघुपुर घाटी के करशैईगाड़ पंचायत में  लावारिस पशुओं का डेरा। संवाद
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बगीचों में सेब के छोटे पौधों को भी कर चट, किसान-बागवान पहरेदारी को मजबूर
रघुपुर घाटी के फनौटी, करशैईगाड़ और लगौटी पंचायतों में सबसे ज्यादा लावारिस पशु

संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले में लावारिस पशुओं से निजात दिलाने में प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग नाकाम साबित हो रहा है। सर्दी आते ही ग्रामीण इलाकों में लावारिस पशुओं ने डेरा जमाना शुरू कर दिया है। खासकर रघुपुर घाटी में इनकी संख्या सबसे ज्यादा है। ये लावारिस पशु खेत-खलिहानों में घुसकर रबी की फसल को तबाह कर रहे हैं। इसके अलावा बगीचों में सेब के छोटे पौधों को भी चटकर रहे हैं। लावारिस पशुओं के आतंग से घाटी के किसान-बागवान परेशान हैं।
कई किसान अपने खेतों की पहरेदारी करने को मजबूर हो गए हैं। ये लावारिस पशु गर्मी के दिनों लोगों की ओर से जोतों और चारागाहों पर छोड़े गए हैं। अब सर्दी के मौसम में ये पशु अब पहाड़ों से निचले इलाकों की तरफ आ गए हैं। रघुपुर घाटी के फनौटी, करशैईगाड़ और लगौटी पंचायतों में इनके कई झुंड देखे जा सकते हैं। अकेली करशैईगाड़ पंचायत के छलाच से लेकर देहुरी के बीच लगभग 100 लावारिस पशु पहुंच गए हैं।
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लावारिस पशु दिन को खेत खलिहानों में घुसकर लहसुन, जौ, गेहूं, मटर और बगीचों में घुसकर दो से पांच साल तक के पौधों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। पंचायत समिति की पूर्व अध्यक्ष जमुना ठाकुर, किसान मीरा देवी, कांता देवी, हीरा देवी, प्रताप सिंह और शिवराज शर्मा ने कहा कि लावारिस पशुओं की समस्या दो एक से दो दशकों से सबसे अधिक बढ़ गई है। सरकार, प्रशासन और पशुपालन विभाग इन पशुओं को गोशालाओं में रखने के लिए कई दावे करते हैं, लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है। इससे किसानों को हर साल लाखों का नुकसान उठाना पड़ता है। कहा कि साल में करीब 10 से 15 फीसदी फसल लावारिस पशु नष्ट कर देते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकारों को इस पर ठोस नीति बनाने की जरूरत है। लोगों के ये पशु हैं उन पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
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करशैईगाड़ पंचायत के छलाल और देहुरी के बीच करीब 100 लावारिस पशु हैं। इसमें कई गाय ऐसी हैं जिनके कानों में टैग लगे हैं। लोग अपनी फसलों को बचाने के लिए पहरा देने को मजबूर हैं। बावजूद इसके रबी की फसल और सेब के पौधों को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। -जमुना ठाकुर, पूर्व अध्यक्ष पंचायत समिति
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लावारिस पशु की समस्या हर साल सर्दी के दिनों में रहती है। खासकर नवंबर माह से लेकर मार्च तक यह पशु लोगों के खेत-खलिहानों में डेरा जमा कर रहते है। इस दौरान लोगों की फसल व सर्दियों को रखा गया पशुचारा को खाकर करते हैं। सरकार को इसके लिए नीति बनानी चाहिए। -मीरा देवी, किसान
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