नवंबर-दिसंबर के बाद जनवरी भी आधा बीता, अभी तक नहीं मिली राहत
बारिश के इंतजार में तरस गईं आंखें, सूखे जैसे हालात ने बढ़ाई लोगाें की चिंता
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। सर्दियों की विदाई और वसंत के आगमन के साथ राहत की उम्मीद थी लेकिन कुल्लू की वादियों में इस बार आसमान खामोश ही रहा।
नवंबर से लेकर वसंत पंचमी तक बारिश और बर्फबारी की एक भी बूंंद न गिरने से सूखे जैसे हालात बन गए हैं। वसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी को मनाया जाएगा। इसके बाद गर्मियों की शुरुआत मानी जाती है। नवंबर और दिसंबर बीतने के बाद अब वसंत भी आ गया है लेकिन बारिश की एक बूंद भी नहीं बरसी है। कई सालों के बाद इस तरह की स्थिति देखने को मिली है।
हैरान करने वाली बात यह है कि देवी-देवताओं के पास बारिश के लिए अरदास लगाई जा रही है। बावजूद इसके बारिश के इंतजार में आंखें तरस गई हैं। वसंत पंचमी के बाद सर्दियों का समापन माना जाता है। कई सालों बाद इस तरह की स्थिति होगी कि सर्दी शुरू होने से लेकर वसंत पंचमी तक बारिश और बर्फबारी नहीं हुई है। लोग कुल्लू में बने मौसम की स्थिति को लेकर चिंता में हैं। लोगों का मानना है कि अगर इसी तरह के हालात रहे तो आने वाले दिनों में मुश्किलें आएंगी।
बागवानी विभाग के विशेषज्ञों ने कहा कि बर्फबारी का न हाेना सेब फसल के लिए चिंताजनक है। बर्फबारी न होने से सेब के चिलिंग ऑवर्स पूरे नहीं होंगे। ऐसे में आगामी फसल प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, रबी फसल की करीब 80 फीसदी बुआई अभी तक नहीं हुई है। घाटीवासी ललित कुमार, चंद्रमोहन ने कहा कि अक्तूबर में कुल्लू में बारिश हुई थी। इसके बाद पहाड़ों पर हल्की बर्फबारी के सिवाय बारिश नहीं हुई है। दिसंबर-जनवरी में पहाड़ बर्फबारी से लकदक रहते थे। ये अब खाली नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सूखे जैसे हालात से गर्मियों के दौरान पेयजल की दिक्कत भी हो सकती है।
देवी-देवताओं के पास बारिश से गुहार लगाई जा रही है। जगती में देवी-देवताओं ने देव नियमों का पालन करने को कहा था। देव नियमों का पालन करना ही देवभूमि के हित में है। - दोत राम ठाकुर, अध्यक्ष, जिला देवी-देवता कारदार संघ