उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। लाहौल घाटी में बर्फबारी मटर व आइसबर्ग के लिए आफत बनकर गिरी है। पहाड़ों में ग्लेशियर के लिए यह बर्फ किसी संजीवनी से कम नहीं है। लेकिन किसान अपने खेतों में बीजे मटर व आइसबर्ग को लेकर चिंतित हैं। इससे फसल खराब होने का डर सता रहा है।
घाटी की सैकड़ों बीघा जमीन पर मटर निराई का कार्य शुरू होने वाला है। कुछ हिस्सों में यह काम शुरू हो गया है। किसान कई दिनों से मटर की निराई के लिए मौसम खुलने का इंतजार कर रहे थे। अब ताजा बर्फबारी ने किसानों की चिंता को बढ़ा दिया है। बर्फबारी से किसानों की फसल भी बर्फ में दब गई। मौसम विज्ञान केंद्र ने 23 अप्रैल तक प्रदेश में मौसम खराब रहने की चेतावनी जारी की है। लाहौल के किसानों का कहना है कि इस सर्दी में पहले के मुकाबले बहुत कम बर्फबारी हुई थी। लाहौल घाटी में इस सर्दी के मौसम की बेरुखी से किसान सिंचाई को लेकर परेेेशान थे। अब फसल बीजने के बाद असमय भारी बर्फबारी ने किसानों को परेशानी में डाल दिया है। पट्टन घाटी के किसान रमेश लाल, दुनी चंद, सुरेश कुमार, प्रेम चंद और शाम लाल का कहना है कि इस सर्दी में कम बर्फबारी हुई है। लेकिन अप्रैल में हो रही बर्फबारी ग्लेशियरों के लिए संजीवनी है। प्रेम चंद और शाम लाल ने कहा कि लाहौल की खेती सिंचाई पर निर्भर है। गर्मी के दिनों में बर्फ पिघलने से इसका फायदा किसानों को होता है। लेकिन फसल बिजाई के असमय बर्फबारी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पट्टन, मयाड़ सहित तोद घाटी में मटर बिजाई हो चुकी है तथा पट्टन घाटी में निराई का कार्य भी शुरू हो गया है। ठोलंग, शांशा, कीरतिंग सहित कई गांव के किसान आइसबर्ग की फसल को लेकर परेशान है।